संस्कृत के स्त्री प्रत्यय..किसे कहते हैं..कुछ संज्ञा शब्द ऐसे होते हैं, जिनके जोड़े शब्द होते हैं.. पुरुष और स्त्री। पुलिङ्ग संज्ञाओं को या शब्दों से स्त्रीलिङ्ग संज्ञा बनाने के लिये कुछ प्रत्ययों का व्याकरण शास्त्र में विधान है.. जो स्त्री प्रत्यय के नाम से जाने जाते हैं।
परिभाषा..पुलिङ्ग् शब्दों को स्त्री लिङ्ग में परिवर्तित करने के लिये जिन प्रत्ययों का प्रयोग किया जाता है,उन्हें स्त्री प्रत्यय कहते हैं।
जैसे… एडक + टाप् > आ = एडका । इस उदाहरण में एडक पुलिङ्ग् शब्द है, जिसमे टाप् लग कर स्त्री लिंग शब्द बन गया है।
आचार्य पाणिनि के ग्रन्थ अष्टाध्यायी में “स्त्रियाम् “ यह अधिकार सूत्र है, यहां से स्त्री प्रत्ययों का विधान (4.1.82) तक किया गया है।स्त्रियाम् इसके अधिकार में में निम्नलिखित स्त्री प्रत्ययों का उल्लेख हैं…
- 1.टाप् (आ )
- 2 ङीप् (ई )
- 3.ङीष् (ई )
- 4..ङीन् (ई )
- 5.डाप् (आ )
- 6.चाप् ( आ )
- 7.ति (ई )
- 8.ऊङ्ग् (ऊ )
टाप् प्रत्यय
सूत्र..अजाद्यतष्टाप्….
अजादीनामकारान्तस्य च वाच्यं यत् स्त्रीत्वं तत्र द्योत्ये टाप् स्यात्…अर्थात अजादि गण में पठित तथा अकारान्त प्रातिपदिक शब्द के साथ स्त्रीलिङ्ग की विवक्षा में टाप् प्रत्यय का प्रयोग होता है।
यह, अज आदि अकारान्त शब्दों के साथ जोड़ा जाता है। अज शब्द की, अर्थवदधातुरप्रत्ययः इस सूत्र से प्रातिपदिक संज्ञा होगी , उसके बाद अजाद्यतष्टाप् इस सूत्र से टाप् प्रत्यय का प्रयोग होगा।इस प्रत्यय का केवल आ जुड़ता है , ट् और प् की हलन्त्यम् इस सूत्र से ,इत् संज्ञा हो कर, तस्यलोपः इस सूत्र से लोप हो जाता है। इसी प्रकारनिम्नलिखित अन्य उदाहरणों में भी समझना चाहिये….
- खट्व+ टाप् = खट्वा
- एडक +टाप् =एडका
- शोभन +टाप् =शोभना
- अश्व +टाप् =वैश्या
- पाक +टाप् =पाका
- कुञ्च +टाप् =कुञ्चा
- कोकिल +टाप् =कोकिला
- अनुकूल +टाप् =अनुकूला
- कृश +टाप् =कृशा
- चपल +टाप् =चपला
- मध्यम +टाप् =मध्यमा
- कनिष्ठ +टाप् =कनिष्ठा
- सरल +टाप् =सरला
- विमल +टाप् =विमला
- उत्तम +टाप् =उत्तमा
- गङ्ग +टाप् =गङ्गा
- पूर्व +टाप् =पूर्वा
- वक्र +टाप् =वक्रा
- क्रूर +टाप् =क्रूरा
- चञ्चल +टाप् =चञ्चला
- दक्ष +टाप् =दक्षा
- प्रथम +टाप् =प्रथमा
- बाल +टाप् =बाला
- हर्ष +टाप् =हर्षा
- वत्स +टाप् =वत्सा
नियम 2
जिस शब्द में टाप् जोड़ना है, उस शब्द के अन्त में यदि क है और उसके पूर्व अ है , तो अ के स्थान पर इ हो जाता है।
इसे सरल ढंग से समझिये.. कि…जिस शब्द के अन्त में अक् है, उसमें टाप् जोड़ते समय अ के स्थान पर इ हो जाता है।
जैसे.. नायक + टाप् = नायिका इस शब्द में य में जो अ है उसके स्थान पर इ हो गया है। नायक में अक है, अतः अ के स्थान पर इ हुआ।
अन्य उदाहरण…
- नाशक +टाप् =नाशिका
- चालक +टाप् =चालिका
- याचक +टाप् =याचिका
- धावक +टाप् = धविका
- दीपक +टाप् =दीपिका
- पाठक +टाप् =पाठिका
- निर्देशक +टाप् =निर्देशिका
- गोपालक +टाप् =गोपालिका
- पालक +टाप् =पालिका
- गायक +टाप् =गायिका
- दायक + टाप् = दायिका
- वादक +टाप् =वादिका
- मूषक +टाप् =मूषिका
- संहारक +टाप् =संहारिका
- सर्वक +टाप् =सर्विका
- लेखक +टाप् = लेखिका
- कारक +टाप् =कारिका
- वादक +टाप् = वदिका
- मामक +टाप् = मामिका
- स्थापक +टाप् =स्थापिका
- धावक +टाप् =धाविका
- बालक +टाप् =बालिका
- स्थापक +टाप् =स्थापिका
- शायक+टाप् =शायिका
- कारक + टाप् (आ ) कारिका
- मूषक +टाप् = मूषिका
- सर्वक + टाप् =सर्विका
- मामक +टाप् = मामिका
संस्कृत के स्त्री प्रत्यय
ङीप् प्रत्यय…
सूत्र-ऋन्नेभ्यो ङीप्
ऋकारान्त और नकारान्त पुलिङ्ग् शब्द अर्थात ऋ और न अन्तवाले पुलिङ्ग् शब्दों को स्त्रीलिङ्ग में बदलने के लिये ङीप् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
ङीप् प्रत्यय का ई जुड़ता है ङ औप प् का लोप हो जाता है।
👉नोट.. जिन शब्दों के अन्त में ऋ होता है..उसका ऋ , र् में परिवर्तित हो जाता है।
- अभिनेतृ +ङीप्=अभिनेत्री
- दातृ +ङीप्= दात्री
- धातृ+ ङीप्= धात्री
- कर्तृ +ङीप्= कर्त्री
- भर्तृ +ङीप्= भर्त्री
- नेतृ +ङीप्= नेत्री
- जेतृ +ङीप् =जेत्री
- जनयितृ + ङीप् = जनयित्री
- विजेतृ +ङीप् =विजेत्री
- गन्तृ +ङीप् =गन्त्री
नकारान्त शब्दों से ङीप् प्रत्यय..
- अधिकारिन् +ङीप्=अधिकारिणी
- मनोहारिन् ङीप्=मनोहारिणी
- दण्डिन् +ङीप्= दण्डिनी
- श्वन् +ङीप्= शुनी
- राजन् +ङीप्= राजी
- वादिन् +ङीप्= वादिनी
- ज्ञानिन् +ङीप्= ज्ञानिनी
- सहसिन् +ङीप्= साहसिनी
- सुखिन् +ङीप्= सुखिनी
- अर्थिन् +ङीप्= अर्थिनी
- उद्योगिन् +ङीप्= उद्योगिनी
- दानिन्+ङीप्= दानिनी
- देहिन् +ङीप्= देहिनी
- कामिन् +ङीप् = कामिनी
- पयस्विन् +ङीप् = पयस्विनी
- दामिन् +ङीप् = दामिनी
- भामिन् +ङीप् =भामिनी
- तेजस्विन् +ङीप् =तेजस्विनी
👉नोट.. जिस शब्द के अन्त में मन् हो , या बहुब्रीहि के अन्त वाले शब्द में ङीप् नहीं होता है।
सूत्र..उगितश्च…
- जिन शब्दों में ऊक् प्रत्याहार (अर्थात उ , ऊ , ऋ , लृ) में आने वाले किसी वर्ण का लोप हुआ हो उनके साथ ङीप् प्रत्यय का प्रयोग करके स्त्रिलिङ्ग बनाते हैं।नोट…धातु के साथ शतृ प्रत्यय का प्रयोग करने पर वह उगित् होता है।
- शतृ प्रत्यय से बने शब्दों के साथ ङीप् का प्रयोग करके स्त्रिलिङ्ग बनाया जाता है। शतृ प्रत्यय के ऋ की उपदेशेऽजनुनासिक इत् से इत् संज्ञा होती है.. जो उक् प्रत्याहार का है… भू +शतृ = भवत् बनता है, जो उगित् है, अतः ङीप् प्रत्यय होगा
जैसे..शब्द + प्रत्यय प्रत्यय से बने शब्द
- कथयन् + ङीप्=कथयन्ती
- नृत्यन् + ङीप्= नृत्यन्ती
- पश्यन् +ङीप्=पश्यन्ती
- गायन् +ङीप्=गायन्ती
- गच्छन् + ङीप् > ई गच्छन्ती
- भवन् + ई =भवन्ती
- पृच्छन् ङीप्= पृच्छन्ती
- पठन् +ई= पठन्ती
- पचन् +ङीप्=पचन्ती
- दीव्यन् +ई= दीव्यन्ती
- चलन् +ई =चलन्ती
- हसन् +ङीप् =हसन्ती
- खादन् +ङीप् = खादन्ती
👉वतुप्और मतुप् प्रत्यय वाले शब्द से ङीप् का प्रयोग गोत है….
वतुप् प्रत्ययान्त शब्द से ङीप्…
- कलावत्+ ङीप्=कलावती
- विद्यावत् +ङीप् =विद्यावती
- बलवत् +ङीप्=बलवती
- धनवत् +ङीप् =धनवती
- रसवत् +ङीप्=रसवती
- फलवत् +ङीप् =फलवती
- भगवत् +ङीप्=भगवती
- नभस्वत् +ङीप्= नभस्वती
- यशस्वत् +ङीप्=यशस्वती
- रूपवत् +ङीप्=रूपवती
- गुणवत् +ङीप् =गुणवती
- धारावत् +ङीप्=धारावती
- विद्युतवत् +ङीप् =विद्युतवती
मतुप् प्रत्ययान्त शब्द से ङीप् प्रत्यय..
- कीर्तिमत् +ङीप्=कीर्तिमती
- हनुमत् +ङीप्=हनुमती
- श्रीमत् +ङीप् =श्रीमती
- धीमत् +ङीप्=धीमती
- धृतिमत् +ङीप् धृतिमती
- मतिमत् +ङीप्=मतिमती
- बुद्धिमत् +ङीप्= बुद्धिमती
- गोमत् +ङीप्=गोमती
- शक्तिमत् +ङीप् =शक्तिमती
- अन्शुमत् +ङीप्=अन्शुमती
- मधुमत् +ङीप् =मधुमती
- वसुमत् +ङीप्=वसुमती
- विधुमत् +ङीप्= विधुमती
👉कर अन्त वाले शब्द में भी ङीप् क प्रयोग किया जाता है…
जैसे… 1..यशस्कर + ङीप् = यशस्करी
2.. भोगकर + ङीप्= भोग करी
3..श्रेयस्कर + ङीप्= श्रेयस्करी
निम्नलिखित अकारान्त शब्दों के बाद भी ङीप् प्रत्यय लगाया जाता है।
| नट +ङीप् | नटी |
| तट +ङीप् | तटी |
| नद +ङीप् | नदी |
| देव +ङीप् | देवी |
| चोर +ङीप् | चोरी |
| प्लव +ङीप् | प्लवी |
| गर +ङीप् | गरी |
| नर्तक +ङीप् | नर्तकी |
| कदल +ङीप् | कदली |
| मृग +ङीप् | मृगी |
| तरुण +ङीप् | तरुणी |
टिड्ढाणञ्द्वयसज्दध्नञ्मामात्रच्तयप् ठक् ठञ् कञ् क्वरपः…
अकारान्त टित् अन्त, ढक्,अण्,अञ्, द्वयसच्,मात्रच्, दधनञ्, तयप्, ठञ्, कञ्, क्वरप् प्रत्ययों से अन्त होने वाले शब्दों को स्त्रीलिङ्ग बनाने के लिये ङीप् प्रत्यय क प्रयोग होता है। लशक्वतद्धिते इस सूत्र से ङीप् के ङ की इत् संज्ञा होगी , तथा हलन्त्यम् से प् की इत् संज्ञा हो कर तस्य लोपः से लोप हो जायेगा।
उदाहरण.. कुरुचर + ङीप् = कुरुचरी.. यहां चर् धातु में चरेष्टः इस सूत्र से ट प्रत्यय हुआ.. यह टित् है। अब उपरोक्त सूत्र से कुरुचर इस शब्द से ङीप् प्रत्यय्क प्रयोग हुआ है।
अन्य उदाहरण..
| नदट्.. टित् | नदी |
| देवट्. टित् | देवी |
| पञ्च. तयप् | पञ्चतयी |
| अक्ष | आक्षिकी |
| अक्ष.. ठक् | आक्षिकी |
| सुपर्णा.. ढक् | सौपर्णेयी |
| इन्द्र. अण् | ऐन्द्री |
| उत्स. अञ् | औत्सी |
| यादृश्.. कञ् | यादृशी |
| उरु द्वयसच् | उरुद्वयसी |
| लवण.. ठञ् | लावणिकी |
| उरु दध्नच् | उरुदध्नी |
| इत्वर क्वरप् | इत्वरी |
| उरु मात्रच् | उरुमात्री |
सूत्र….”वयसि प्रथमे…”
प्रथमवयोवाचिनोऽदन्तात्स्त्रियाम् ङीप् स्यात् ……प्रथम अवस्था के बारे में बताने वाले अदन्त शब्द , जिनके अन्त में अ हो, उन्हे स्त्री लिङ्ग में परिवर्तित करने के लिये ङीप् का प्रयोग होता है जैसे..
कुमार + ङीप्= कुमारी… कुमार शब्द अदन्त है तथा प्रथम अवस्था का वाचक है।
वयसिअचरमे.. (वार्तिक)..
वृद्धावस्था को छोड़कर अवस्था वाचक शब्दों के साथ ङीप् प्रत्यय का प्रयोग हो… इस वार्तिक से निम्नलिखित शब्दों के साथ ङीप् का प्रयोग हुआ..
- वधूट +ङीप्= वधूटी
- चिरण्ट +ङीप् =चिरण्टी
- किशोर +ङीप्= किशोरी
👉नोट..चरम वृद्धावस्था बताने वाले शब्द के साथ ङीप् नहीं होता है।
जैसे..वृद्धा , स्थविरा ये चरम अर्थात अत्यन्त वृद्ध अवस्था के वाचक हैं। अतः इन शब्दों से ङीप् न हो कर टाप् हुआ है ।
द्विगोः.. अदन्तात् द्विगोर्ङीप् स्यात्
- द्विगु समास वाले ऐसे शब्द जिनके अन्त में अ होता है उन पदों को स्त्रीलिङ्ग में परिवर्तित करने के लिये से ङीप् का प्रयोग होता है।
जैसे..त्रिलोक + ङीप् = त्रिलोकी… त्रिलोक शब्द द्विगु समास से निष्पन्न है। अतः ङीप् प्रत्यय हुआ।
- त्रिपद +ङीप्=त्रिपादी
- अष्टाध्याय +ङीप्= अष्टाध्यायी
- पञ्चवट +ङीप्=पञ्चवटी
- पञ्चमी +ङीप्= पञ्चमी
इसी प्रकार त्रिलोक भी अदन्त द्विगु है परन्तु त्रिफल अजादि गण में है, अतः अजादि गण के शब्दों से टाप् प्रत्यय होगा।
सूत्र..वर्णाद् अनुदात्तात् तोपधात् तो नः..
अनुदात्त अन्त, अदन्त और त उपधा वाले वर्ण वाचक शब्द से विकल्प से ङीप् हो तथा त को न आदेश होता है।जैसे..
एत + ङीप् (ई ) = एती… यहां एत शब्द वर्ण वाचक है, उपधा में त है, अन्तिम वर्ण अ है जो अनुदात्त है, अनुपसर्जन है, अतः इससे स्त्रीलिङ्ग बनाने के लिये ङीप् (ई ) का प्रयोग हुआ।
क्योंकि इस में विकल्प से होना है अतः ङीप् न होने पर टाप् का प्रयोग हो कर एता रूप बनेगा।
- रोहित + ङीप् (ई ) = रोहिणी/ रोहित+ टाप् = रोहिता
- एत + ङीप् (ई ) = एती /एत +टाप् =एता
- श्येन +ङीप्=श्येनी /श्येन +टाप् =श्येता
- हरिन +ङीप्=हरिणी /हरिता
ङीष् प्रत्यय
सूत्र.. षिद्गौरादिभ्यश्च…
षिद्भ्यो गौरादिभ्यश्च स्त्रियां ङीष् स्यात्। षित् प्रत्ययान्त् शब्दों से तथा गौर आदि शब्दों से स्त्रीलिङ्ग बनाने हेतु ङीष् का प्रयोग होता है।
ङीष् प्रत्यय का केवल ई जुड़ता है.. ङ और प् का लोप हो जाता है। यह निम्नलिखित शब्दों के साथ जोड़ा जाता है..गौर आदि शब्दों से तथा षित् प्रत्ययान्त शब्दों के अनन्तर ङीष् का प्रयोग होता है।
| आमलक +ङीष् | आमलकी |
| गौर +ङीष् | गौरी |
| उभय +ङीष् | उभयी |
| मङ्गल +ङीष् | मङ्गली |
| मण्डल +ङीष् | मण्डली |
| नर्तक +ङीष् | नर्तकी |
| पर्थिक +ङीष् | पर्थिकी |
| हरिण +ङीष् | हरिणी |
| बदर +ङीष् | बदरी |
| उभय + ङीष् | उभयी |
| नट + ङीष् | नटी |
| मातामह +ङीष् | मातामही |
| पितामह +ङीष् | पितामही |
संस्कृत के स्त्री प्रत्यय
ऐसे पुलिङ्ग् शब्द जो नर या पुरुष का द्योतक हो उसे स्त्री लिङ्ग में परिवर्तित करने के लिये ङीष् प्रत्यय का प्रयोग होता है।
- जैसे..गोपः + ङीष् >ई गोपी
- शूद्रः + ई शूद्री
वोतो गुण वचनात्..उदन्तात् गुणवचिनो वा ङीष् स्यात्।
उकारान्त गुण वाचक शब्दों को स्त्रिलिङ्ग् में परिवर्तित करने के लिये ङीष् प्रत्यय का प्रयोग होता है। परन्तु विकल्प से..अर्थात हो भी सकता है नहीं भी।
जैसे..मृदु + ङीष्= मृद्वी….मृदु शब्द के अन्त में उ है तथा गुण वाचक है अतः ङीष् का प्रयोग हुआ। ङ तथा ष् की इत् संज्ञा हो कर लोप हुआ तथा मृदु+ई में यण् हो कर मृद्वी रूप बना…
विकल्प की अवस्था में
ङीष् न होने पर मृदुः रूपबनेगा
बह्वादिभ्यश्च.. एभ्यो वा ङीष् स्यात्
- बहु आदि शब्द से विकल्प से ङीष् होता है।..जैसे.. बहु + ङीष्= बह्वी
👉विकल्प की स्थिति अर्थात ङीष् नहीं लगने पर..बहुः ।
कृदिकारादक्तिनः..
- क्तिन् प्रत्यय को छोड़ कर सभी इकारान्त शब्दों के साथ,/ जिनके अन्त में कृत् प्रत्यय का इ हो ,स्त्रिलिङ्ग् में ङीष् का प्रयोग विकल्प से होता है।
जैसे..रात्रिः +ङीष्= रात्री। ङीष् न् होने पर रात्रिः, ऐसा शब्द बनेगा।
👉इन्द्रवरुणभवशर्वरुद्रभृडहिमारण्य यवयवनमातुलाचार्याणामानुक् ….इन्द्र , वरुण , भव , शर्व , रुद्र , मृड , आचार्य इनके बाद… ङीष् प्रत्यय हो तथा…
👉प्रत्यय लगने के पूर्व शब्दों में आनुक् का आन् जोड़ा जाता है।
- विस्तार बताने के लिये …. हिम और अरण्य के बाद ,
- खराब यव के अर्थ में यव शब्द के बाद ,
- यवनों की लिपि का बोध कराने ले लिये यवन शब्द के बाद तथा
- मातुल और उपाध्याय शब्द के बाद ङीष् का प्रयोग होता है।
- जैसे..इन्द्र + आनुक् ( आन् ) + ङीष्= इन्द्राणी।
- वरुण +आन् +ङीष् >ई = वरुणानी
- शर्व +आन् +ङीष् = शर्वानी
- भव +आन् +ङीष् = भवानी
- रुद्र +आन् +ङीष् = रुद्रानी
- मृड +आन् +ङीष् = मृडानी
- आचार्य +आन् +ङीष् = आचार्यानी
- यव +आन् +ङीष् = यवानी
- यवन +आन् +ङीष् = यवनानी
- मातुल +आन् +ङीष् = मातुलानी
- उपाध्याय +आन् +ङीष्=उपध्यायानी
- हिम +आन् +ङीष्=हिमानी
- अरण्य +आन् +ङीष्=अरण्यानी
👉जातेरस्त्रीविषयादयोपधात् …जातिवाचि यन्न च स्त्रियां नियतमयोपधं ततः स्त्रियां ङीष् स्यात्। तटी। वृषली। कठी।
अ अन्त वाले जतिवाचक शब्द, जो नित्य स्त्रिलिङ्ग न हों, तथा जिनकी उपधा में य, न हो तो उनके साथ ङीष् प्रत्यय का प्रयोग होता है। जैसे…
- ब्रह्मण + ङीष्= ब्रह्माणी
- तट + ङीष् = तटी
- वृषल + ङीष् = वृषली
- कठ + ङीष् = कठी
- औपगव +ङीष् = औपगवी
- मृग + ङीष् = मृगी
- हरिण + ङीष् = हरिणी
ङीन्…(ई ) सूत्र शरङ्गरवाद्यञोङीन्
ङीन् का केवल ई जुड़ता है।ङ तथा प् का लोप हो जाता है।
यह कहां प्रयुक्त होता है..
👉जाति वाचक शारङ्गरव आदि शब्दों के साथ ङीन् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
जैसे..शार्ङ्गरव + ङीन् (ई )= शार्ङ्गरवी
👉अञ् प्रत्यय का अ जिस शब्द के अन्त में हो उससे ङीन् प्रत्यय का प्रयोग होता है।
👉तथा नृ और नर शब्दों से ङीन् का प्रयोग होता है।
- जैसे..वेद + ई = वैदी
- नर + ई = नारी
- नृ +ङीन् -ई = नारी
नोट.. नृ और नर दोनों शब्दों में वृद्धि हो कर तथा आर हो कर नारी बना।
संस्कृत के स्त्री प्रत्यय…
ति प्रत्यय..(इ )सूत्र..यूनस्तिः..
युवन शब्द को स्त्रिलिङ्ग् में बदलने के लिये ति का प्रयोग किया जाता है।
जैसे.. युवन +ति = युवति
उपर्युक्त शब्द में युवन के न का लोप हो जाता है। तत्पश्चात ङीष् लग कर युवती शब्द बना।
डाप्..(आ) प्रत्यय
सूत्र.. डाबुञाञ्यामन्यतरस्याम्
मन और अन अंत वाले शब्दों को स्त्री लिंग में बदलने के लिए डाप् (आ )प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- जैसे..दामन्+ डाप् (आ )=दामा
- बहुयज्वन् + डाप् (आ )=बहुयज्वा
- सीमन् + डाप् (आ )= सीमा
- सुचर्मन् + डाप् (आ )=सुचर्वा
- पामन् + डाप् (आ )= पामा
- बहु राजन् +डाप् (आ )= बहुराजा
संस्कृत के स्त्री प्रत्यय उङ्ग् प्रत्यय..(ऊ )
ऊङ्ग् प्रत्यय के ङ का लोप हो कर केवल ऊ जुड़ता है।
👉मनुष्य जाति वाचक उकारांत अर्थात उ अंत वाले तथा जिसकी उपधा में य नहीं हो , ऐसे शब्दों से स्त्रीलिंग में ऊंग -(ऊ )का प्रयोग होता है।
जैसे ..कुरु+ ऊंग (ऊ)= कुरू
श्वसुर + ऊंग (ऊ)= श्वश्रू
पङ्गु + ऊंग (ऊ)= पङ्गू
👉जिन शब्दों की उपधा में य हो तो उनके साथ ऊंग नहीं होता है।
जैसे.. अध्वर्यु यह मनुष्य जाति वाचक है परन्तु , इस शब्द में उ की उपधा में य है , अतः ऊंग प्रत्यय नहीं होगा ।
सूत्र..संहित शफ लक्षण वाम्देश्च..
👉संहित,शफ,लक्षण और वाम इन शब्दों के साथ उरु शब्द जुड़ा हो तो इन्हें स्त्री लिंग में बदलने के लिए ऊंग प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
- संहितोरु + उङ्ग् -ऊ = संहितोरू
- शफोरु + उङ्ग् -ऊ = शफोरू
- लक्षणोरु+ उङ्ग् -ऊ = लक्षणोरू
- वामोरु +उङ्ग् -ऊ = वामोरू
👉जिस प्रातिपदिक का पहला पद उपमान वाचक हो तथा दूसरा उरु हो तो उसके साथ् उङ्ग् प्रत्यय का प्रयोग होता है।जैसे..करभोरु + उङ्ग् (ऊ )= करभोरू
संस्कृत के स्त्री प्रत्यय
चाप् (आ )प्रत्यय…सूर्याद् देवतायां चाप् वाच्यः…
“देवता जाति की स्त्री ” अर्थ में स्त्रिलिङ्ग् बनाने के लिये चाप् प्रत्यय का प्रयोग होता है।
जैसे..सूर्य + चाप् > आ = सूर्या
प्रश्न उत्तर.
- 2..नारी में कौन सा प्रत्यय है?
- 3..टाप् प्रत्यय क्या है?
- 4..गायिका में कौन सा स्त्री प्रत्यय जुड़ा है?
- 5..नारी में कौन सा प्रत्यय है?
- 6..इन्द्राणी में कौन सा प्रत्यय है?
- 7…डाप /चाप् ,प्रत्यय का क्या जुड़ता है?
उत्तर…
- 2.ङीप् प्रत्यय
- 3..टाप् एक स्त्री प्रत्यय है, इसका आ जुड़ता है।
- 4..टाप् प्रत्यय
- 5..ङीन् प्रत्यय इस प्रत्यय का भी ई जुड़ता है।
- 6..ङीष् प्रत्यय…इन्द्र + आनुक् ( आन् ) + ङीष्= इन्द्राणी।
- 7..डाप् चाप् का आ जुड़ता है।
अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न
✅ उत्तर
🔹 खण्ड–A (बहुविकल्पीय प्रश्न)
- “नायिका” शब्द में कौन सा प्रत्यय है?
(A) टाप्
(B) ङीप्
(C) ङीन्
(D) चाप् - “कर्त्री” शब्द किस प्रत्यय से बना है?
(A) टाप्
(B) ङीप्
(C) ङीष्
(D) डाप् - “गौरी” शब्द में कौन सा प्रत्यय है?
(A) टाप्
(B) ङीप्
(C) ङीष्
(D) ऊङ्ग् - “नारी” शब्द किस प्रत्यय से बना है?
(A) टाप्
(B) ङीन्
(C) ङीष्
(D) ति - “युवती” शब्द में कौन सा प्रत्यय है?
(A) टाप्
(B) ति
(C) ङीप्
(D) डाप्
खण्ड–B (रिक्त स्थान भरें)
- नायक + टाप् = ________
- कर्तृ + ङीप् = ________
- इन्द्र + ________ = इन्द्राणी
- नर + ङीन् = ________
- युवन + ति = ________
खण्ड–C (सही / गलत)
- टाप् प्रत्यय से “ई” जुड़ता है। (___)
- ङीप् प्रत्यय का प्रयोग ऋकारान्त शब्दों के साथ होता है। (___)
- “गायिका” में ङीष् प्रत्यय है। (___)
- “श्वश्रू” में ऊङ्ग् प्रत्यय है। (___)
- “भवानी” में ङीष् प्रत्यय है। (___)
खण्ड–D (मिलान कीजिए)
| स्तम्भ A | स्तम्भ B |
|---|---|
| 1. कर्तृ | (a) गौरी |
| 2. गौर | (b) कर्त्री |
| 3. नर | (c) नारी |
| 4. युवन | (d) युवती |
खण्ड–E (रूप बनाइए)
निम्न शब्दों के स्त्रीलिङ्ग रूप बनाइए—
- गायक
- दाता
- भर्तृ
- गोप
- बालक
- शूद्र
- पङ्गु
- सूर्य
उत्तर (Answer Key)
खण्ड–A
- (A)
- (B)
- (C)
- (B)
- (B)
खण्ड–B
- नायिका
- कर्त्री
- आनुक् + ङीष्
- नारी
- युवती
खण्ड–C
- ❌ गलत
- ✅ सही
- ❌ गलत
- ✅ सही
- ✅ सही
खण्ड–D
1 → (b)
2 → (a)
3 → (c)
4 → (d)
खण्ड–E
- गायक → गायिका
- दाता → दात्री
- भर्तृ → भर्त्री
- गोप → गोपी
- बालक → बालिका
- शूद्र → शूद्री
- पङ्गु → पङ्गू
- सूर्य → सूर्या
शतृ प्रत्यय Introduction With Example