णिनि-इनि प्रत्यय =संस्कृत में णिनि (इनि) एक तद्धित प्रत्यय है। इसका प्रयोग सामान्यतः “युक्त”, “धारण करने वाला” या “वाला” अर्थ में किया जाता है। यह प्रत्यय प्रायः संज्ञा शब्दों के साथ लगकर ऐसे शब्द बनाता है जो किसी गुण, वस्तु या भाव से युक्त होने का बोध कराते हैं।
उदाहरण के लिए –
ज्ञान से युक्त व्यक्ति ज्ञानी कहलाता है।
उदाहरण
साहस + णिनि → साहसिन् → साहसी (साहस वाला)
इसी प्रकार –
फल + णिनि → फलिन् → फली (फल वाला)
इस प्रकार णिनि प्रत्यय का अर्थ मतुप् प्रत्यय के समान “युक्त” या “वाला” होता है।
णिनि-इनि प्रत्यय के प्रयोग के नियम
- णिनि प्रत्यय में से केवल “इन्” शेष रहता है।
इसमें “ण” और अंतिम “इ” का लोप हो जाता है। उदाहरण –
दण्ड + णिनि → दण्डिन् - इस प्रत्यय से बने शब्द सामान्यतः विशेषण होते हैं अतः….
- वाक्य में जिस शब्द के साथ यह विशेषण के रूप में प्रयोग होता है, उसी के अनुसार लिङ्ग, वचन और विभक्ति बदलते हैं। उदाहरण –
देवेशः अभिमानी आसीत्।
यहाँ देवेशः पुल्लिङ्ग एकवचन है, इसलिए अभिमानी भी पुल्लिङ्ग एकवचन में है। - क्योंकि णिनि प्रत्यय से बने हुए शब्द विशेषण होते हैं, अतः इनके रूप तीनों लिङ्ग में तथा सात विभक्तियों में चलते हैं।
- णिनि/इनि प्रत्यय भी मतुप् प्रत्यय की भांति प्रयुक्त होता है।यह कर्तृ वाच्य मे प्रयुक्त होता है, तथा अकारान्त संज्ञा शब्दों के साथ इस प्रत्यय का प्रयोग होता है।
णिनि प्रत्यय से बने शब्दों के रूप
1. पुल्लिङ्ग
पुल्लिङ्ग में इनका रूप दण्डिन् शब्द के समान चलता है।
उदाहरण –
सुख + णिनि → सुखिन् → सुखी
यहाँ एकवचन में न् का लोप होकर “सुखी ” बनता है।
2. स्त्रीलिङ्ग
स्त्रीलिङ्ग बनाने के लिए ङीप् प्रत्यय लगाया जाता है।
उदाहरण –
सुख + णिनि =सुखिन् + ङीप् → सुखिनी
👉ध्यान देने योग्य बात यह है कि…स्त्रीलिङ्ग में न् का लोप नहीं होता।
3. नपुंसकलिङ्ग
नपुंसकलिङ्ग एकवचन में रूप गुणि होता है। इसमें न् का लोप होता है।
णिनि प्रत्यय के उदाहरण..
शब्द +प्रत्यय पु. स्त्री. नपुं.
- सुख+ णिनि = सुखी सुखिनी सुखि
- दुख+ णिनि = दुखी दुखिनी दुखि
- दान +णिनि =दानी दानिनी दानि
- मान +णिनि = मानी मानिनी मानि
- शूल +णिनि = शूली शूलिनी शूलि
- लोभ +णिनि =लोभी, लोभिनी..,. लोभि
- व्यवसाय +णिनि =व्यवसायी (उपरोक्त प्रकार से निम्न लिखित शब्द भी बनेंगे )
- देह +णिनि =देही
- पक्ष +णिनि =पक्षी
- क्रोध +णिनि =क्रोधी
- .मन्त्र +णिनि =मन्त्री
- योग +णिनि =योगी
- वैर +णिनि =वैरी
- वास +णिनि =वासी
- त्याग +णिनि =त्यागी
- ज्ञान +णिनि =ज्ञानी
- उन्माद +णिनि =उन्मादी
- दन्त +णिनि =दन्ती
- संसार +णिनि =संसारी
- अर्थ +णिनि =अर्थी
- धन +णिनि =धनी
- विज्ञान +णिनि =विज्ञानी
- विलास +णिनि =विलासी
- विहार +णिनि =विहारी
- हस्त +णिनि =हस्ती
- अधिकार +णिनि =अधिकारी
णिनि-इनि प्रत्यय से बने शब्दों का वाक्य में प्रयोग
- राज्य सभायाम् मन्त्रिणः भाषयन्ति।
- एका वृद्धा दुखिनी आसीत्।
- ये जनाः गुणिनः भवन्ति तेषां आदरं सर्वे एव कुर्वन्ति।
- धनस्य लोभिनः जनाः आसक्ताः भूत्वा दुखिनः भवन्ति।
- दानी मानम् त्यजेत्।
- भाग्यशालिनः जनाः विश्रामं कुर्वन्ति।
- पक्षिणः आकाशे उड्डयन्ति।
- धनी पुरुषः धनसंचयं करोति।
- महेशः कर्तव्यनिष्ठः अधिकारी अस्ति।
- कविता अत्यन्त क्रोधिनी अस्ति।
- लोभिनः शान्तिं न प्राप्नुवन्ति।
- इयं महिला व्यवसायिनी अस्ति।
- किम् कुलेन विशालेन विद्या हीनस्य देहिनः।
मतुप् और वतुप् प्रत्यय परिचय व उदाहरण के लिये पढिये..
संस्कृत संज्ञा विधायक सूत्र के लिये इसे देखें
अनीयर प्रत्यय के लिये इसे पढिये
णिनि / इनि प्रत्यय – अभ्यास प्रश्न (Worksheet)
1. रिक्त स्थान भरिये
- ज्ञान + णिनि = ______
- गुण + णिनि = ______
- धन + णिनि = ______
- सुख + णिनि = ______
- फल + णिनि = ______
- पाप + णिनि = ______
- बल + णिनि = ______
- योग + णिनि = ______
- दान + णिनि = ______
- रोग + णिनि = ______
2. निम्न शब्दों में णिनि प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइये
- क्रोध
- मान
- मन्त्र
- रूप
- वास
- वर्ण
- पक्ष
- शूल
- संसार
- व्यवहार
3. सही विकल्प चुनिए (MCQ)
- “ज्ञानी” शब्द किस प्रत्यय से बना है?
A. मतुप्
B. तव्यत्
C. णिनि
D. क्त - णिनि प्रत्यय का अर्थ होता है —
A. करने योग्य
B. युक्त / वाला
C. किया हुआ
D. भविष्य - “धनी” शब्द का मूल शब्द क्या है?
A. धन
B. धान
C. धनी
D. धना - “योगी” शब्द में कौन सा प्रत्यय लगा है?
A. मतुप्
B. णिनि
C. क्त
D. तव्यत् - “सुखी” शब्द का सही रूप निर्माण क्या है?
A. सुख + क्त
B. सुख + मतुप्
C. सुख + णिनि
D. सुख + तव्यत्
4. निम्न शब्दों से स्त्रीलिङ्ग रूप बनाइये
- ज्ञानी → ______
- धनी → ______
- योगी → ______
- गुणी → ______
- पापी → ______
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