ल्यप् प्रत्यय उदाहरण और वाक्य

जब किसी वाक्य में एक ही कर्ता द्वारा दो क्रियाएँ की जाती हैं —
और पहली क्रिया “करके (after doing)” के अर्थ में होती है — तब ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।

👉 विशेष बात:
जब धातु के पहले उपसर्ग (prefix) लगा होता है, तभी ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग होता है।

👉 इस प्रत्यय से बने शब्द अव्यय (indeclinable) होते हैं।

जैसे..

सः वृक्षम् आरुह्य फलानि त्रोटयति।
वह वृक्ष पर चढ़कर फल तोड़ता है।

सभायां प्रविश्य सः उच्चैः अहसत्।
सभा में प्रवेश करके वह जोर से हँसा।

धनिकः ब्राह्मणाय वस्त्रं प्रदाय संतुष्टोऽभवत्।
धनिक ब्राह्मण को वस्त्र दे कर संतुष्ट हुआ।

पत्रम् विलिख्य, मोहनः पत्रालयं अगच्छत्।
पत्र लिख कर मोहन पत्रालय गया।

ल्यप् प्रत्यय के प्रयोग के नियम….

**ल्यप् को धातु के साथ जोड़ने के, या इसे जोड़ कर रूप बनाने के नियम तथा ध्यान देने योग्य बातें…..निम्नलिखित हैं….

  • यदि धातु से पहले कोई उपसर्ग आये तो ही ल्यप् का प्रयोग होता है।
  • इस प्रत्यय के लिये उपसर्ग का होना आवश्यक है।
  • धातु के साथ ल्यप् का य जुड़ता है। ल् और प् नहीं।

दीर्घ स्वर (आ, ई, ऊ) वाली धातुएँ

👉 यदि धातु का अंत आ, ई, ऊ से हो, तो केवल “य” लगता है।

उदाहरण:

  • वि + क्री + ल्यप् ( ल्यप् का य ) सम् +भू +य =संभूय ( हो कर )

आ +दा + ल्यप् (ल्यप् का य )
वि +हा +य = आदाय

आ +नी +ल्यप् = आनीय
निर् +मा + ल्यप् = निर्माय

**क्योंकि यहां क्री में तथा भू में और हा में स्वर है,इसलिये य् का प्रयोग हुआ है।

ह्रस्व स्वर (अ, इ, उ, ऋ) वाली धातुएँ

👉 यदि धातु का अंत अ, इ, उ, ऋ से हो, तो “य” से पहले त् लगता है।

कुछ धातुओं के साथ ल्यप् का प्रयोग होने पर य के पूर्व त् का आगम होता है।जिन धातुओं के अन्त में (अ,इ,उ,ऋ ) इनमें से कोई स्वर होता है,तो य के पहले त् लगता है।

उदाहरण:

  • आ +शृ +ल्यप् =आश्रित्य शृ में ऋ है, अतः त् का आगम हुआ।
  • सम् +हृ +ल्यप् =संहृत्य
  • अधि +इ +ल्यप् =अधीत्य
  • निस् +चित् +ल्यप् =निश्चित्य
  • वि +स्मृ +ल्यप् विस्मृत्य
  • परि +कृ +ल्यप् =परिष्कृत्य

दीर्घ ऋ (ॠ) होने पर

👉 यदि धातु के अंत में दीर्घ ऋ हो, तो “ईर्य” बनता है।

  • जैसे..उत् + कॄ+ल्यप् = उत्कीर्य
  • सम् + तॄ+ल्यप् = संतीर्य
  • वि +स्तॄ+ल्यप् =विस्तीर्य

म् और न् का लोप (कभी-कभी/विकल्प से )

👉 जिन धातुओं के अंत में म् या न् हो, उनमें कभी लोप होता है और कभी नहीं। इसे विकल्प से लोप होना कहते हैं।

उदाहरण:

  • अव + गम् + ल्यप् = अवगम्य (म् का लोप नही हुआ )
  • अव + गम् + ल्यप् = अवगत्य (म् का लोप हुआ ) म का लोप हो कर य के पहले त् लगा है। म् का लोप होने पर ग में अ स्वर है अतः त् का प्रयोग हुआ है।
  • प्र +नम् +ल्यप् =प्रणम्य /प्रणत्य

ल्यप् प्रत्यय के 50+ उदाहर

  1. आगम्य =आ +गम् +ल्यप्
  2. निर् +दिश् +ल्यप्=निर्दिश्य
  3. अव +लम्ब् +ल्यप्=अवलम्ब्य
  4. अव +तृ +ल्यप्=अवतीर्य्
  5. आ +शकि +ल्यप्=आशङ्क्य
  6. अव +लोक् +ल्यप्=अवलोक्य
  7. अप +कृ +ल्यप्=अपकृत्य
  8. उत् +स्था +ल्यप्=उत्थाय
  9. सम् +पूज् +ल्यप्=संपूज्य
  10. वि +हस् +ल्यप्=विहस्य
  11. आ +रभ् +ल्यप् =आरभ्य
  12. स्वी +कृ +ल्यप्=स्वीकृत्य
  13. निः +सृ +ल्यप् =निःसृत्य
  14. प्रति +ज्ञा +ल्यप् =प्रतिज्ञाय
  15. आ +कृ +ल्यप् =आकर्ण्य
  16. प्र +क्षाल् +ल्यप् =प्रक्षाल्य
  17. प्र +विश् +ल्यप् =प्रविश्य
  18. वि +चिन्त् +ल्यप् =विचिन्त्य
  19. वि +भज्+ ल्यप् =विभज्य
  20. निर् ++ल्यप् =निर्दिश्य
  21. आ +हु +ल्यप् =आहुत्य
  22. सम् =पठ् +ल्यप् =संपठ्य
  23. प्र +शंस +ल्यप् =प्रशंस्य
  24. आ +रुह् +ल्यप् =आरुह्य
  25. प्र +आप् +ल्यप् =प्राप्य
  26. निर् +ईक्ष् +ल्यप् =निरीक्ष्य
  27. उत् +स्था +ल्यप् =उत्थाय
  28. उप +सेव् +ल्यप् =उपसेव्य
  29. सम् +स्तु +ल्यप् =संस्तुत्य
  30. परि +त्रै +ल्यप्=परित्राय
  31. उप +विश् +ल्यप्=उपविश्य
  32. आ +पा +ल्यप्=आपीय
  33. परि +श्रम् +ल्यप् =परिश्र्म्य
  34. निः +श्वस् +ल्यप् =निःश्वस्य
  35. वि +रम् +ल्यप् =विरम्य
  36. प्र +स्था +ल्यप्=प्रस्थाय
  37. आ+ हू +ल्यप्=आहूय
  38. वि +हा +ल्यप्=विहाय
  39. उप +सृ +ल्यप् उपसृत्य
  40. वि +आ +पद् +ल्यप् =व्यापाद्य

ल्यप् प्रत्यय से बने पदों का वाक्य में प्रयोग

  1. कार्यं समाप्य पठ्।
  2. सा गृहं आगत्य सेवायां तत्परा अभवत्।
  3. स्वदेशं परित्यज्य कुत्र गमिष्यसि?
  4. देवः पुष्पं समाघ्राय प्रसन्नः अस्ति।
  5. सन्धिम् प्रकल्प्य बहिः आगच्छ।
  6. धनं प्रदाय नृपः प्रसीदति।
  7. नकुलः सर्पं व्यापाद्य खण्डशः कृतवान।
  8. विकासः प्रातः उत्थाय उद्याने परिभ्रम्य जीवनं यापयति।
  9. सः वने प्रविश्य औषधिं आनयति।
  10. विषादं परित्यज्य उद्यमम् कुरु।
  11. उद्यानं उपगम्य पुष्पाणि आनय।
  12. छात्रौ कक्षायाः निर्गत्य वार्तां कुरुतः।
  13. मातुः वचनं निशम्य अष्टावक्रः अवदत्..
  14. तं हसन्तं विलोक्य सर्वे स्तब्धाः जाताः।
  15. छात्रा: पुस्तकानि अधीत्य पाठं स्मरन्ति।

निष्कर्ष

👉 जब एक ही कर्ता दो कार्य करता है और पहला कार्य “करके” के अर्थ में हो
👉 तथा धातु के पहले उपसर्ग हो

➡️ तब ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है और उससे बने शब्द अव्यय होते हैं।

प्रश्न

  • 1..ल्यप् किस अर्थ में प्रयुक्त होता है?
  • .2.उत् +स्था +ल्यप् =?
  • 3..कार्यं समाप्य पठ.. रेखांकित शब्द का प्रकृति अलग करिये..
  • 4..सर्वम् विज्ञाय सः अवदत्…रेखांकित शब्द का प्रकृति अलग करिये..
  • 5..निपुणं निरीक्ष्य पठति.. सही विकल्प चुनिये… क..निर् +ईक्ष , ख.. निर् +ईक्ष् +ल्यप्, ग.. निरी +ईक्ष्य
  • 6..प्रत्यागत्य इसका प्रकृति प्रत्यय क्या है?

उत्तर..

  • 1..इस प्रत्यय का प्रयोग ‘ करके ‘(After Doing)इस अर्थ में होता है।
  • 2..उत्थाय.
  • 3..सम् +आप् +ल्यप्
  • 4..वि +ज्ञा +ल्यप्
  • 5..निर् +ईक्ष् +ल्यप्
  • प्रति +आ +गम् +ल्यप्

👉निम्न लिखित प्रश्नों को आप इस लेख की सहायता से स्वयं करें…

1..सिंहः मृगं व्यपाद्य ततः अगच्छत् ।

(क) वि + आ + पद + ल्यप् (ख) व्यापद् + य (ग) वि + आ + पद् + ल्यप् (घ) विपाद् + ल्यप्

2..सज्जनाः विचार्य एव कार्यम् कुर्वन्ति।

(क) वि + चर् + ल्यप् (ख) वि + चार् + ल्यप् (ग) वि + चर + य(घ) वि + चर +ल्यप्

3..छात्रः शिक्षकं प्रणम्य गच्छति।

(क) प्र + णम् + ल्यप् (ख) प्र + णम्य (ग) प्र + नम् + ल्यप् (घ) प्रनम + ल्यप्

4..रमा वि हस् + ल्यप् वार्तालापं करोति ।

(क) विहस्य (ख) विहसय (ग) विहाय (घ) विह्स्य

5…सेवकः नृपं प्र नम् + ल्यप् उपविशति ।

(क) प्रणम्य (ख) प्रणत्य (ग) प्रनम्य (घ) प्रणयन्

6..सैनिकाः सीमाप्रदेशं प्राप्य देशं रक्षन्ति ।

(क) प्राप् + य (ख ) प्र + आप् + ल्यप् (ग) प्र + ल्यप् (घ) प्राप् + ल्यप्

7..आलस्यं वि + हा + ल्यप् उद्यमम् कुरु।

(क) विहाय (ख) वीहाय्य (ग) वीहाय् (घ) विहात्य

8..त्वं समाचारं वि + ज्ञा + ल्यप् गच्छ।

(क) विज्ञाय (ख) विज्ञातम् (ग) विज्ञातुम् (घ) विज्ञात्वा

9..देवं सम्पूज्य पाठं पठ।

(क)सम् + पूज् + ल्यप् (ख) सम् + पुज् + यत् (ग) सम् + पूज + ल्यप् (घ) सम् + पूज्य

10..प्रकृतिप्रत्ययानां समुचितं संयोजनं कृत्वा रिक्तस्यानानि पूरयत-

  • विद्यालयात् …….त्वं किं करोषि ? ( आ+गम् +ल्यप् )
  • महापुरुषाः जनान् …….. प्रसीदन्ति। ( उप +कृ +ल्यप् )
  • कदापि जनान्………… मा प्रसीदेत्। (तिरस्+कृ +ल्यप्)
  • माता पुत्रम्…………… संलपति। ( उप +गम्+ल्यप् )
  • हस्तौ…………. भोजनं कुरु। (प्र +क्षाल् +ल्यप् )
  • छात्रे कक्षायाः……….. वार्तां कुरुतः। (निर् +गम् +ल्यप् )

ल्यप् प्रत्यय – FAQ (Frequently Asked Questions)

❓ 1. ल्यप् प्रत्यय क्या है?

👉 ल्यप् एक कृत् प्रत्यय है, जिसका प्रयोग “करके (after doing)” के अर्थ में किया जाता है।
इससे बने शब्द अव्यय (indeclinable) होते हैं।

2.ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग कब होता है?

👉 जब एक ही कर्ता द्वारा एक वाक्य में दो क्रियाएँ की जाती हैं,
और पहली क्रिया “करके” के अर्थ में हो — तब ल्यप् प्रत्यय का प्रयोग होता है।

शतृ प्रत्यय के लिये इसे देखिये

णिनि इनि प्रत्यय और उदाहरण

तव्यत प्रत्यय परिचय उदाहरण

अनीयर प्रत्यय संस्कृत व्याकरण

संस्कृत संज्ञा विधायक सूत्र

शानच प्रत्यय के लिये इसे देखें

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