Tavyat Pratyay.. तव्यत प्रत्यय का प्रयोग संस्कृत भाषा में चाहिये या योग्य अर्थ में कर्मवाच्य और भाववाच्य में होता है तथा विधिलिङ्ग् लकार के अर्थ में भी होता है।
संस्कृत व्याकरण में तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग “चाहिए, करना उचित है, करना योग्य है” आदि अर्थों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। इस प्रत्यय से बने शब्दों में किसी कार्य के कर्तव्य, आवश्यकता, संभावना या अनुमति का भाव प्रकट होता है।
सामान्यतः तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग कर्मवाच्य तथा भाववाच्य में किया जाता है, जबकि कर्तृवाच्य में इसका प्रयोग नहीं किया जाता। कई बार यह विधिलिङ्ग् लकार के समान अर्थ भी व्यक्त करता है।
प्रत्यय का रूप
व्यवहार में तव्यत् प्रत्यय के अन्तिम ‘त’ वर्ण का लोप हो जाता है, केवल “तव्य” का ही प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण
चल् + तव्यत् → चलितव्य
(अर्थ — चला जाना चाहिए)
लिङ्ग के अनुसार रूप
तव्यत् प्रत्यय से बने शब्द तीनों लिङ्गों में प्रयोग किए जाते हैं।
1. पुल्लिङ्ग (राम शब्द की तरह)
गन्तव्यः – गन्तव्यौ – गन्तव्याः
2. स्त्रीलिङ्ग (रमा शब्द की तरह)
लेखितव्या – लेखितव्ये – लेखितव्याः
3. नपुंसकलिङ्ग (फल शब्द की तरह)
खादितव्यम् – खादितव्ये – खादितव्यानि
सकर्मक धातुओं के साथ प्रयोग Tavyat pratyay
जब सकर्मक धातुओं के साथ तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है, तथा वाक्य कर्मवाच्य में होता है।
इस स्थिति में –
- कर्ता प्रायः तृतीया विभक्ति (कभी-कभी षष्ठी) में होता है।
- कर्म प्रथमा विभक्ति में आ जाता है।
- क्रिया का लिङ्ग और वचन कर्म के अनुसार होता है।
(नोट… इस प्रत्यय के प्रयोग में कर्म वाच्य के नियम रहते हैं। )
उदाहरण
त्वया स्वकार्यं कर्तव्यम् ।
अर्थ – तुम्हें अपना कार्य करना चाहिये।
यहाँ कार्यम् एकवचन है, इसलिए कर्तव्यम् भी एकवचन में प्रयोग हुआ है।
मया फले खादितव्ये।
अर्थ – मुझे दो फल खाना चाहिए।
अकर्मक धातुओं के साथ तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग
संस्कृत व्याकरण में अकर्मक धातुओं के साथ जब तव्यत् प्रत्यय लगाया जाता है, तब वाक्य का प्रयोग सामान्यतः भाववाच्य में होता है। ऐसे वाक्यों में क्रिया किसी विशेष कर्म से सम्बद्ध नहीं होती, बल्कि केवल कार्य के होने की आवश्यकता या कर्तव्यभाव को प्रकट करती है।
भाववाच्य में क्रिया का रूप
अकर्मक धातुओं के साथ तव्यत् प्रत्यय लगने पर क्रिया का रूप सदैव नपुंसकलिङ्ग और एकवचन में रहता है।
इस स्थिति में कर्ता के लिङ्ग और वचन का क्रिया पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
अर्थात् कर्ता चाहे एक हो या अनेक, स्त्रीलिङ्ग हो या पुल्लिङ्ग — क्रिया का रूप वही रहता है…. सदा नपुंसकलिङ्ग एक वचन
उदाहरण
तेन गन्तव्यं शयितव्यम्।
(उन्हें जाना चाहिए।)
युष्माभिः शयितव्यम्।
(तुम सबको सोना चाहिए।)
बालकैः शयितव्यम्।
(बच्चों को सोना चाहिए।)
युष्माभिः वक्तव्यम्।
(तुम सब को बोलना चाहिए।)
अस्माभिः धाव्यते।
(हमारे द्वारा दौड़ा जाता है।)
इन सभी वाक्यों में कोई कर्म नहीं है, क्रिया नपुंसकलिङ्ग एकवचन में ही प्रयोग हुई है।
कर्ता की विभक्ति
इस प्रकार के वाक्यों में कर्ता तृतीया विभक्ति में आता है।
कभी-कभी षष्ठी विभक्ति का प्रयोग भी देखा जाता है।
विशेषण के रूप में Tavyat pratyay का प्रयोग
तव्यत् प्रत्यय से बने शब्द कई बार विशेषण के रूप में भी प्रयुक्त होते हैं। ऐसी स्थिति में इनका लिङ्ग, वचन और विभक्ति अपने विशेष्य (जिस शब्द का विशेषण हो) के अनुसार बदल जाते हैं।
Tavyat pratyay के वाक्य उदाहरण (अर्थ सहित)
तव्यत् प्रत्यय से बने शब्दों का प्रयोग संस्कृत में “करना चाहिए” या “करना आवश्यक है” के अर्थ में किया जाता है। नीचे कुछ वाक्य और उनके हिन्दी अर्थ दिए गए हैं —
| संस्कृत वाक्य | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| छात्रेण गीता पठितव्या | छात्र के द्वारा गीता पढ़ी जानी चाहिए |
| रमया कथा श्रोतव्या | रमा को कथा सुननी चाहिए |
| अस्माभिः पाठाः पठितव्याः | हमें पाठ याद करना चाहिए |
| तैः छात्रैः असत्यं न वक्तव्यम् | उस छात्रों के द्वारा असत्य नहीं बोलना चाहिए |
| रात्रि काले गृहात् बहिः न भ्रमितव्यम् | रात्रि के समय में घर से बाहर नहीं घूमना चाहिए |
| अस्माभिः पर्यावरणः रक्षितव्यः | हमें पर्यावरण की रक्षा करना चाहिए |
| पुत्रेण पितरौ सेवितव्यौ | पुत्र के द्वारामाता पिता की सेवा करनी चाहिये |
| युष्माभिः फलानि भोक्तव्यानि। | तुम सब को फल खाना चाहिए |
| सर्वैः निर्मलं जलम् पातव्यं | सभी को स्वच्छ जल पीना चाहिए |
| कलहः न कर्तव्यः | कलह नहीं करना चाहिये |
| पठनीया ग्रन्थाः पठितव्याः | पढ़ने योग्य ग्रन्थ पढ़ना चाहिए |
| अस्माभिः असत्य प्रियं न वक्तव्यम् | लोगों को असत्य और प्रिय वचन नहीं बोलने चाहिए |
| बालकैः प्रेरककथाः श्रोतव्याः | बालकों के द्वारा प्रेरक कथाएं सुननी चाहिए |
| उचित अवसरे एव हसितव्यं | उचित समय पर ही हसना चाहिए |
| युवाभ्याम् आपणात् पुस्तकानि आनेतव्यानि | टुइम्चा दोनों को बाजार से पुस्तकें लानी चाहिए |
| बालकाय उष्णं दुग्धं न दातव्यं। | बालक को गरम दूध नहीं देना चाहिए |
| सर्वैः गुरुः नन्तव्यं | सभी के द्वारा गुरु को नमन करना चाहिए |
अकर्मक धातुओं के साथ तव्यत् प्रत्यय
| संस्कृत वाक्य | हिन्दी अर्थ |
|---|---|
| तेन हसितव्यं | उनके द्वारा हंसना चाहिए। |
| बालकैः क्रीडितव्यम् | संगीत सुनना चाहिए |
| रक्त दुर्गं द्रष्टव्यं | लाल किला देखने योग्य है। |
| बालाकाभ्यां शयितव्यम् | दो बालकों को सोना चाहिए |
| मानवैः परोपकारी भवितव्यम् | मनुष्यों को परोपकारी होना चाहिये |
कुछ धातुओं के तव्यत् प्रत्यय के साथ बने हुए रूप…
| धातु | पुलिङ्ग | स्त्रीलिङ्ग | नपुंसक लिङ्ग |
| पठ् | पठितव्यः | पठितव्या | पठितव्यम् |
| गम् | गन्तव्यः | गन्तव्या | गन्तव्यम् |
| चल् | चलितव्य: | चलितव्या | चलितव्यं |
| हस् | हसितव्यः | हसितव्या | हसितव्यम् |
| नम् | नन्तव्यः | नन्तव्या | नन्तव्यम् |
| हन् | हन्तव्यः | हन्तव्या | हन्तव्यम् |
| कृ | कर्तव्यः | कर्तव्या | कर्तव्यम् |
| पाल् | पालयितव्यः | पालयितव्यः | पालयितव्यम् |
| भुज् | भोक्तव्यः | भोक्तव्या | भोक्तव्यm |
| स्ना | स्नातव्यः | स्नातव्या | स्नातव्यं |
| गै | गातव्यः | गातव्या | गातव्यम् |
| धाव् | धावितव्यः | धावितव्या | धावितव्यम् |
| लिख् | लेखितव्यः | लेखितव्या | लेखितव्यम् |
| पत् | पतितव्यः | पतितव्या | पतितव्यम् |
| भ्रम् | भ्रमितव्यः | भ्रमितव्या | भ्रमितव्यम् |
| खाद् | खादितव्यः | खादितव्या | खादितव्यम् |
| वद् | वक्तव्यः | वक्तव्या | वक्तव्यं |
| जि | जेतव्यः | जेतव्या | जेतव्यम् |
| ज्ञा | ज्ञातव्यः | ज्ञातव्या | ज्ञातव्यम् |
| दा | दातव्यः | दातव्या | दातव्यं |
| दृश् | दृष्टव्यः | दृष्टव्या | दृष्टव्यम् |
| भी | भेतव्यः | भेतव्या | भेतव्यम् |
| लभ् | लब्धव्यः | लब्धव्या | लब्धव्यम् |
| हृ | हर्तव्यः | हर्तव्या | हर्तव्यम् |
| एध् | एधितव्यः | एधितव्यः | एधितव्यः |
अनीयर प्रत्यय के लियेइसे देखें..
संस्कृत संज्ञा विधायक सूत्र के लिये इसे देखिये..
ऊपर लिखे हुए रूप के आधार पर पुलिङ्ग् में राम की तरह, स्त्रिलिङ्ग् में रमा की तरह तथा नपुंसक लिङ्ग में फल की तरह रूप बना लेना चाहिये।
FAQ – तव्यत् प्रत्यय (Tavyat Pratyay)
1. तव्यत् प्रत्यय क्या होता है?
तव्यत् प्रत्यय संस्कृत में “चाहिए”, “योग्य है”, “उचित है” आदि अर्थों को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है।
2. तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग किन वाच्यों में होता है?
इसका प्रयोग मुख्यतः कर्मवाच्य और भाववाच्य में होता है, कर्तृवाच्य में नहीं।
3. तव्यत् प्रत्यय का वास्तविक रूप क्या होता है?
व्यवहार में “तव्यत्” का अंतिम ‘त्’ लोप होकर केवल “तव्य” रह जाता है।
4. तव्यत् प्रत्यय किस लकार के समान अर्थ देता है?
यह कई बार विधिलिङ्ग् लकार (should/ought) के समान अर्थ देता है।
5. सकर्मक धातु के साथ तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग कैसे होता है?
- कर्ता → तृतीया विभक्ति में
- कर्म → प्रथमा विभक्ति में
- क्रिया → कर्म के अनुसार
6. अकर्मक धातु के साथ तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग कैसे होता है?
- वाक्य भाववाच्य में होता है
- क्रिया हमेशा नपुंसकलिङ्ग एकवचन में रहती है
7. क्या तव्यत् प्रत्यय से बने शब्द तीनों लिङ्गों में होते हैं?
हाँ, ये पुल्लिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग तीनों में प्रयोग होते हैं।
8. तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग विशेषण के रूप में कैसे होता है?
जब यह विशेषण के रूप में आता है, तो इसका लिङ्ग, वचन और विभक्ति विशेष्य के अनुसार बदलता है।
9. क्या तव्यत् प्रत्यय कर्तव्य (duty) का भाव व्यक्त करता है?
हाँ, यह कर्तव्य, आवश्यकता, उचितता और संभावना का भाव प्रकट करता है।
10. उदाहरण में “त्वया कर्तव्यम्” का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है — “तुम्हें करना चाहिए।”
अभ्यास कार्य (Practice Exercises)
अभ्यास 1: रिक्त स्थान भरिए
कोष्ठक में दी गई धातु से तव्यत् प्रत्यय लगाकर वाक्य पूर्ण करें—
- त्वया पुस्तकं __________ (पठ्) ।
- मया फलानि __________ (खाद्) ।
- अस्माभिः सत्यं __________ (वद्) ।
- बालकैः शीघ्रं __________ (धाव्) ।
- युष्माभिः पाठः __________ (स्मृ) ।
अभ्यास 2: सही विकल्प चुनिए
- “गन्तव्य” का सही अर्थ क्या है?
(a) गया
(b) जाना चाहिए
(c) जाता है - तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग कहाँ होता है?
(a) कर्तृवाच्य
(b) कर्मवाच्य
(c) दोनों - “कर्तव्यम्” किस लिङ्ग में है?
(a) पुल्लिङ्ग
(b) स्त्रीलिङ्ग
(c) नपुंसकलिङ्ग
अभ्यास 3: वाक्य सुधार कीजिए
नीचे दिए गए वाक्यों में त्रुटि सुधारें—
- त्वया कार्यः कर्तव्यम् ।
- मया फलम् खादितव्याः।
- बालकः शयितव्यम्।
- अस्माभिः गच्छन्ति।
अभ्यास कार्य – उत्तर (Answers)
🟢 अभ्यास 1: रिक्त स्थान भरिए
- त्वया पुस्तकं पठितव्यम् ।
- मया फलानि खादितव्यानि ।
- अस्माभिः सत्यं वक्तव्यम् ।
- बालकैः शीघ्रं धावितव्यम् ।
- युष्माभिः पाठः स्मर्तव्यः ।
अभ्यास 2: सही विकल्प
- “गन्तव्य” का सही अर्थ —
✔ (b) जाना चाहिए - तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग —
✔ (b) कर्मवाच्य - “कर्तव्यम्” का लिङ्ग —
✔ (c) नपुंसकलिङ्ग
अभ्यास 3: वाक्य सुधार
- ❌ त्वया कार्यः कर्तव्यः।
✔ त्वया कार्यं कर्तव्यम्। - ❌ मया फलम् खादितव्याः।
✔ मया फलम् खादितव्यम्। - ❌ बालकः शयितव्यम्।
✔ बालकेन शयितव्यम्। - ❌ अस्माभिः गच्छन्ति।
✔ अस्माभिः गन्तव्यम्।
Very nice content to understand easily this topic…. thank you so much sir or madam🙏🏼