संस्कृत व्याकरण में अनीयर प्रत्यय एक महत्वपूर्ण कृत् प्रत्यय है, जो धातुओं के साथ जुड़कर ऐसे शब्द बनाता है जिनमें योग्यता (योग्य होना) या कर्तव्य (करना चाहिए) का भाव व्यक्त होता है।
यह वर्तमान काल के अर्थ में प्रयोग किया जाता है।
अनीयर् प्रत्यय क्या है?
जब किसी कार्य को “करना उचित है”, “करने योग्य है” या “करना चाहिए” — ऐसा अर्थ प्रकट करना हो, तब अनीयर् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।
👉 सरल शब्दों में:
- योग्यता अर्थ में → खादनीय मिष्ठानं (खाने योग्य मिठाई )
- करना चाहिए →परिश्रमं करणीयम् (परिश्रम करना चाहिए)
निम्न लिखित मुख्य अर्थ में प्रयोग
1. योग्यता (योग्य होना)
जिस कार्य को करना उचित या उपयुक्त हो
👉 उदाहरण:
- एषः ग्रन्थः पठनीयः।
(यह ग्रन्थ पढ़ने योग्य है)
2.कर्तव्य / चाहिए अर्थ
जहाँ कर्तव्य या सलाह दी जाती है
👉 उदाहरण:
- अस्माभिः सत्यं वचनीयम् → (अनीयर)
- (हमको सत्य बोलना चाहिए)
👉अनीयर प्रत्यय का प्रयोग सकर्मक और अकर्मक दोनों के साथ होता है.। जब सकर्मक धातुओं के साथ प्रयोग किया जाता है तो वाक्य कर्म वाच्य में होता है।
वाच्य के अनुसार प्रयोग
✔ कर्मवाच्य में
जब वाक्य कर्मवाच्य होता है, तब—
- कर्ता → तृतीया विभक्ति
- कर्म → प्रथमा विभक्ति
- क्रिया → कर्म के अनुसार
👉 उदाहरण:
- मया पत्रं लेखनीयम्।
(मुझसे पत्र लिखा जाना चाहिए)
👉**जब अकर्मक धातुओं के साथ प्रयुक्त होता है तो वाक्य भाव वाच्य में होता है।
भाववाच्य में (अकर्मक धातु)
- कर्म नहीं होता
- कर्ता → तृतीया
- क्रिया → नपुंसकलिङ्ग, एकवचन
👉 उदाहरण:
- त्वया गमनीयम्।
(तुम्हें जाना चाहिए)
अनीयर् प्रत्यय के नियम
- अनीयर् →के “र्” का लोप हो जाता है
- शेष: रहता है अनीय
👉 उदाहरण:
- दृश् +अनीयर =दर्शनीय
लिङ्ग के अनुसार रूप
धातु में प्रत्यय लगने के बाद ये शब्द बन जाते हैं, इसलिये इनके रूप सात विभक्तियों में और तीनों लिङ्ग में चलते हैं तथा..
- पुलिङ्ग में… बालक की तरह
- स्त्री लिङ्ग में बालिका की तरह
- नपुंसक लिङ्ग में फल की तरह रूप बनाते हैं।
| लिङ्ग | रूप एक वचन | द्विवचन | बहुवचन |
|---|---|---|---|
| पुल्लिंग | पठनीयः | पठनीयौ | पठनीयाः |
| स्त्रीलिंग | खादनीया | खादनीये | खादनीयाः |
| नपुंसक | आपनीयम् | आपनीये | आपनीयानी |
धातु में स्वर में परिवर्तन (महत्वपूर्ण नियम)
यदि धातु में ये स्वर हों—(इ, उ, ऋ ) तो निम्नलिखित परिवर्तन होता है
| स्वर | बदलकर |
|---|---|
| इ | ए |
| उ | ओ |
| ऋ | अर् |
👉 उदाहरण:
- क्षिप् → क्षेपनीय
- चुर् → चोरणीय
- दृश् → दर्शनीय
धतुओं के साथ अनीयर् प्रत्यय से बने शब्द
अनीयर प्रत्यय के 30+ उदाहरण
- पठ् = पठनीय
- चल् =चलनीय
- गम् =गमनीय
- नम् =नमनीय
- हन्=हननीय
- भुज् = भोजनीय
- कृ =करणीय
- क्री =क्रयणीय
- नी =नयनीय
- जि =जयनीय
- वद् = वदनीय
- चि = चयनीय
- एध् =एधनीय
- वृध् = वर्धनीय
- दृश्=दर्शनीय
- लिख्=लेखनीय
- पत्= पतनीय
- पा = पानीय
- भ्रम्=भ्रमणीय
- खाद् =खादनीय
- गै=गानीय
- चिन्त् =चिन्तनीय
- पच् =पचनीय
- दा=दानीय
- त्यज् =त्यजनीय
- वह् =वहनीय
- पूज् =पूजनीय
- अर्च् =अर्चनीय
- दण्ड =दण्डनीय
- चुर् =चोरणीय
- पृच्छ् =पृच्छनीय
- भक्ष् =भक्षणीय
- मन् =मननीय
- रम् =स्मरणीय
- चर् = चरणीय
अनीयर् से युक्त शब्दों के वाक्य….
सकर्मक वाक्य..
- 1..त्वया प्रातः काले जागरणीयम् ।
- 2..अधुना मया औषधयः भक्षणीयाः ।
- 3..लतया श्लोकः पठनीया।
- 4..युवाभ्याम् यथाशक्तिः प्रयत्नः करणीयः।
- 5..प्रातः उत्थाय भ्रमणः करणीयः ।
- 6..आरक्षिकेन चौरः दण्डनीयः।
- 7..सर्वैः जनैः प्रतिदिनं समचारपत्रम् पठनीयं ।
- 8..नृपेन् योग्यः जनः दानीयः।
- 9..युवाभ्याम् एकादश कक्षायां उचितविषयाः चयनीया:।
- 10.. दर्शकैः पशवः न पीडनीयाः
- 11..पथिकेन बसयानात् हस्तः बहिः न करणीयः ।
- 12..शिष्येन गुरू सेवनीयौ।
- 13..त्वया नूतन वस्त्राणि क्रयणीयानि ।
- 14..काली दासस्य रचनाः प्रशंसनीयाः।
- 15..चिकित्सालये उच्चैः न वदनीयः ।
अकर्मक क्रिया के साथ अनीयर प्रत्यय के वाक्य
- 1..गुरुणा उपदेशनीयम् ।
- 2..बालकेन् शयनीयम् ।
- 3..तेन लेखनीयम् ।
- 4..गायकेन गानीयम् ।
- 5..बद्दलेन् वर्षणीयम् ।
- 6..त्वया शीघ्रं गमनीयम्।
- 7..मया अत्र स्थेयम्।
- 8..तेन उपविशनीयम्।
अनीयर प्रत्यय का विशेषण के रूप में प्रयोग..
कई स्थानों पर अनीयर से बने शब्द विशेषण के रूप में भी प्रयोग किये जाते हैं…
✔ विशेषण रूप
- एषा कथा श्रवणीया अस्ति।
- एतत् स्थानं दर्शनीयम्।
- सः पुरुषः माननीयः अस्ति।
- गुरूणां आज्ञा अविचारणीया भवति।
- चयनीयानि पुष्पाणि।
- माता पूजनीया अस्ति।
- मातृभूमिः रक्षणीया।
- पठनीयं पुस्तकं।
- एषा द्रष्टव्या नगरी अस्ति।
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Ktva Pratyay Sanskrit Vyakarana
प्रश्न-उत्तर
1..प्रश्न.. अनीयर् प्रत्यय का प्रयोग किस अर्थ में होता है?
उत्तर… योग्य अर्थ में तथा चाहिये के अर्थ में जैसे इदं जलं पानीयं अर्थात यह जल पीने योग्य है। त्वया पठनीयं अर्थात तुम्हें पढ़ना चाहिये।
अनीयर प्रत्यय अभ्यास कार्य…
- पुस्तकेषु किमपि न लिख् +अनीयर =?
- अस्माभिः विद्यालयस्य अनुशासनम् पाल् +अनीयर =?
- पितरः सदैव वन्द् +अनीयर् =?
- परयावरणं रक्ष् +अनीयर्=?
- ते जनाः वन्द् +अनीयर्=?
- नागरिकेन देश सेवा कृ +अनीयर्=?
- ग्रीष्म काले शीतलम् जलम् पा +अनीयर्=?
- बालिकाभिः राष्ट्र गीतं गै +अनीयर्=?
- अवकाशार्थं प्रार्थना पत्रम् लिख् +अनीयर्=?
- युष्माभिः सेवकाः सेव् +अनीयर्=?
- प्रातः काले देव दर्शनं कृ +अनीयर्=?
- अस्माभिः पादपाः सिञ्च् +अनीयर्=?
- प्रकृतेः शोभा खलु दृश् +अनीयर्=?
- अस्माभिः गङ्गा नदी दूषिता न कृ+अनीयर्=?