संस्कृत व्याकरण में शानच प्रत्यय का प्रयोग वर्तमान काल में “होता हुआ / करते हुए” अर्थ व्यक्त करने के लिए किया जाता है। यह प्रत्यय मुख्यतः आत्मनेपदी धातुओं के साथ लगाया जाता है।
जब शानच् प्रत्यय धातु के साथ जुड़ता है, तब इसके “श्” और “च्” का लोप हो जाता है और केवल “आन्” शेष रहता है। इस प्रकार बने शब्द प्रायः विशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
उदाहरण
सेव् + शानच् → सेवमानः
अर्थ – सेवा करता हुआ
शतृ और शानच प्रत्यय में अंतर
संस्कृत में शतृ और शानच् दोनों प्रत्यय “करता हुआ” अर्थ देते हैं, परन्तु इनके प्रयोग में अंतर होता है।
| प्रत्यय | प्रयोग |
|---|---|
| शतृ | परस्मैपदी धातुओं के साथ |
| शानच् | आत्मनेपदी धातुओं के साथ |
क्योंकि,शानच् से बने शब्द विशेषण बन जाते हैं,अतः पुलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग तथा नपुंसक लिङ्ग में तथा तीनो वचनों में प्रयोग किये जाते हैं।
जैसे..
- पुल्लिङ्ग… वर्धमानः वर्धमानौ वर्धमानाः
- स्त्रीलिङ्ग.. वर्धमाना वर्धमाने वर्धमानाः
- नपुंसकलिङ्ग… वर्धमानम् वर्धमाने वर्धमानानि
शानच् प्रत्यय के प्रयोग के नियम
1. प्रत्यय का रूप
धातु के साथ शानच् लगने पर “आन्” जुड़ता है।
उदाहरण
लभ् + शानच् → लभमानः
नियम
- शानच् का धातु के साथ प्रयोग करने पर शानच् का आन जुड़ता है, श् और च् का लोप हो जाता है, अर्थात वह नहीं जुड़ता है।
- शानच् का पुलिङ्ग् में आन स्त्रिलिङ्ग् में आना तथा नपुन्सक् लिङ्ग में आनम् जुड़ता है।
2.“म् “का आगम
धातु के अन्तिम अक्षर के बाद तथा आन् के पहले (मुक् ) का म् जुड़ता है।
जैसे..
- पुलिन्ग में.. सेव् + शानच् > आन्
- सेव् +(मुक् )का > म्
- सेव् + म् + आन् = सेवमान्
3.स्त्रीलिङ्ग निर्माण
स्त्रीलिङ्ग बनाने के लिए टाप् प्रत्यय (आ) लगाया जाता है।
👉स्त्रीलिंग में..आन् के बाद टाप् प्रत्यय का आ जुड़ कर रूप इस प्रकार बनेगा ..
- लभ् + शानच् > आन
- लभ् + मुक् > म् + आन्
- लभ् + म् + आन् + टाप् > आ= लभमाना
- सेव् + शानच् = सेवमाना
4.नपुंसकलिङ्ग रूप
नपुंसकलिङ्ग में रूप आनम् से बनता है। अर्थात ***नपुन्सक् लिङ्ग में धातु के साथ आनम् जुड़ता है।
उदाहरण
वन्द् + म् + आनम् → वन्दमानम्
वन्द् + म् + आनम् = वन्दमानम्
कुछ अन्य ध्यान देने योग्य बातें….
- यदि शानच् के पूर्व अकारान्त धातु रूप आये तो शानच् के आन के स्थान पर मान जुड़ता है।
- शानच् प्रत्यायन्त शब्द के लिङ्ग, वचन व विभक्ति विशेष्य के अनुसार चलेंगे। अर्थात क्योंकि इस प्रत्यय से बने शब्द विशेषण बन जाते हैं, इसलिये जिस लिङ्ग, वचन और विभक्ति में विशेष्य होगा उसी प्रकार ये शब्द भी बनेंगे।
- जैसे.. मुदमाना बालिका… यहां बालिका स्त्रीलिङ्ग एक वचन में है अतः मुदमाना भी स्त्रिलिङ्ग एक वचन में प्रयुक्त हुआ।
- इस प्रत्यय से बने शब्दों के रूप पुलिंग में बालक की तरह , स्त्रीलिंग में बालिका तथा नपुंसक लिंग में फल के समान रुप बनते हैं।
शानच प्रत्यय के साथ धातुओं के विभिन्न लिङ्गों में बने शब्द…
| धातु | पुलिन्ग | स्त्रिलिङ्ग् | नपुन्सक् लिङ्ग |
| प्रकाश | प्रकशमानः | प्रकशमाना | प्रकशमानम् |
| युध् | युध्यमानः | युध्यमाना | युध्यमानम् |
| याच् | याचमानः | याचमाना | याचमानम् |
| रम् | रममाणः | रममाणा | रममाणम् |
| *द्युत् | द्युतमानः | द्युतमाना | द्युतमानम् |
| दा | दीयमानः | दीयमाना | दीयमानम् |
| दीप् | दीपमानः | दीपमाना | दीपमानम् |
| *आस् | आसीन: | आसीना | आसीनम् |
| त्वर् | त्वरमाणः | त्वरमाणा | त्वरमाणम् |
| दय् | दयमानः | दयमाना | दयमानम् |
| *नी | नयमानः | नयमाना | नयमानम् |
| *पू | पवमानः | पवमाना | पवमानम् |
| मन् | मन्यमानः | मन्यमाना | मन्यमानम् |
| यज् | यजमानः | यजमाना | यजमानम् |
| *वृत् | वर्तमानः | वर्तमाना | वर्तमानम् |
| व्यथ् | व्यथमानः | व्यथमाना | व्यथमानम् |
| *शी | शीयमानः | शीयमाना | शीयमानम् |
कुछ विशेष धातुओं में होने वाला परिवर्तन
ऊपर दी गई तालिका में कुछ् धातुओं के पास * लगा हुआ है।उन धातुओं से शानच् लगने के बाद जो परिवर्तन निम्नलिखित कारण से हुआ है…
आस् धातु के बाद आन् के स्थान पर ईन् हो जाता है।
उदाहरण – आसीनः
वृध् / वृत् धातु में ऋ का गुण होकर अर् हो जाता है।
उदाहरण – वर्तमानः
मुद् और द्युत् धातु में उ का गुण होकर ओ हो जाता है।
शी धातु में यण संधि से ई → य् हो जाता है।
शानच प्रत्यय का वाक्य में प्रयोग
1. सैनिकाः युध्मानाः देशं रक्षन्ति।
सैनिक युद्ध करते हुए देश की रक्षा करते हैं।
2.प्रकशमानैः नक्षत्रैः आकाशः शोभते।
चमकते हुए नक्षत्रों से आकाश शोभित होता है।
3.वन्दमाना बालिकया गीतं गीयते।
वन्दना करती हुई बालिका के द्वारा गीत गाया जाता है।
4.कम्पमानेभ्यः वृक्षेभ्यः पुष्पाणि पतन्ति।
हिलते हुए वृक्षों से फूल गिरते हैं।y
5.माता शयानं बालकं रक्षति। माता सोते हुए बालक की रक्षा करती है।
यह प्रत्यय भी दो वाक्यों को जोड़ने का कार्य करता है , जैसे..
- दिलीपः गां सेवते। दिलीप गाय की सेवा करते हैं।
- दिलीपः सिंहम् पश्यति। दिलीप सिंह को देखते हैं।
इस प्रत्यय के द्वारा यह दोनों वाक्य जुड़ कर इस प्रकार बनेगा….
- गां सेवमानः दिलीपः सिंहम् पश्यति।
इसी प्रकार अन्य वाक्य..
- पुत्रः माता पितरौ सेवते। सः स्व कर्तव्यं निर्वहति।
- मातापितरौ सेवमानः पुत्रः स्वकर्तव्यं निर्वहति।
- ते मोदन्ते। ते गायन्ति
- मोदमानाः ते गायन्ति।
अन्य उदाहरण…
- *कष्टं सहमानाः जनाः दुखिनः भवन्ति।
- *मुदमाना रमा नृत्यति।
- *तस्याः वर्धमाना प्रगतिः पितरं हृष्यति।
- *प्रयत्मानाः जनाः साफल्यं आप्नुवन्ति।
- प्रयत्न करते हुए मनुष्य सफलता प्राप्त करते हैं।
- *फलम् लभमाना बाला प्रसीदति।
- *किम् रोचमाणाः ते प्रसीदन्ति।
- *त्वम् चल्यमानं वाहनं पश्य।
- तुम चलते हुए वाहन को देखो।
- *धनम् लभमानः ( लभ् +शानच् ) भिक्षुकः आशीर्वचनानि यच्छति।
- धन प्राप्त करता हुआ भिक्षुक आशीर्वाद देता है।
- *सत्यं ब्रूयमानाः नराः सम्मानम् प्राप्नुवन्ति।
- सत्य बोलते हुए नर सम्मान प्राप्त करते हैं।
- *पुरस्कारं लभमानः छात्रः प्रसन्नः भवति।
- पुरस्कार प्राप्त करता हुआ छात्र प्रसन्न होता है।
- *दुखितान् जनान् सेवमानाः जनाः पुण्यं लभते।
- दुखी लोगों की सेवा करते हुए मनुष्य पुण्य प्राप्त करते हैं।
- *निरन्तरं वर्धमानेन प्रदुषणेन मानवजातिः विविधैः रोगैः आक्रान्ता अस्ति।
- *काल: सदैव गम्यमानः वर्तते।
- समय सदा गतिशील होता है।
- *देवं वन्दमानाः भक्ताः प्रसीदन्ति।
- देव की वन्दना करते हुए भक्त प्रसन्न होते हैं।
नोट..आस् धातु के बाद शानच् आने पर शानच् के आन् को ईन् हो जाता है।
प्रश्न-उत्तर..
प्रश्न.1.शानच् प्रत्यय किस प्रकार का प्रत्यय है ?
उत्तर.. वर्त्मनकालिक कृदन्त प्रत्यय।
प्रश्न.2.इस प्रत्यय का प्रयोग किस अर्थ में होता है?
उत्तर..’होता हुआ ‘ इस अर्थ में।
प्रश्न.3.यह किस प्रकार की धातुओं के साथ प्रयुक्त होता है?
उत्तर..आत्मनेपद धातुओं के साथ।
प्रश्न.4…धातु के साथ प्रयुक्त होने पर शानच् का कितना भाग जुड़ता है?
उत्तर..शानच् का धातु के साथ प्रयोग करने पर शानच् का आन जुड़ता है, श् और च् का लोप हो जाता है, अर्थात वह नहीं जुड़ता है।
प्रश्न. 5..किं (रुच् +शानच् )ते प्रसीदन्ति?
उत्तर.. रोचमाणाः
प्रश्न.. 6..त्वं (चल् +शानच् ) वाहनं पश्य?
उत्तर.. चल्यमानं।
प्रश्न. 7.फलं (लभ् +शानच् ) बालाः प्रसीदन्ति?
उत्तर.. लभमानाः।
प्रकृतिप्रत्ययानां समुचितं संयोजनं कृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयत-
8…प्रकृति जोड़ कर रिक्त स्थान पूर्ति करिये…
- ……….जनः आदरं न प्राप्नोति।(याच् + शानच्)
- ………..नरः न शोभते। (याच् + शानच्)
- प्रेरणां……….बालिका सफलतां लभते ।(लम् + शानचू)
- पितरं………. पुत्रः सन्तोषं भजते। (सेव् + शानच्)
- …………..वृद्धाय वस्त्रं यच्छ। (कम्प् + शानच्)
- गुरुं………. शिष्याः प्रसन्नाः भवन्ति।(सेव् + शानच्)
- पुरस्कारं…………छात्राः प्रसीदन्ति।(लभ् + शानच्)
- वृद्धान्………… पुत्राः दीर्घायुं प्राप्यन्ते।(सेव् + शानच्)
- पारितोषिकं………. विद्यार्थी प्रसन्नः भवति।(लभ् + शानच्)
- मातरं………..बाला शोभते। (सेव् + शानच्)
- भिक्षां…………भिक्षुकाःदुःखिताः भवन्ति ।(याच् + शानच्)
- पुरस्कार…….गायकः गीतं गायेत्।(लम् + शानच्)
9..प्रकृति प्रत्यय अलग करिये…
- सीता पाठं पठ्यमाना उपविशति ।
- तत्र एकः शयानः बालः तिष्ठति ।
- आत्मानं मुषितं मन्यमानः ब्राह्मणः परं विषादम् अगच्छत् ।
- श्यामः कथ्यमानः अस्ति ।
- मोदमानाः मयूराः नृत्यन्ति ।
- प्रयतमानाः जनाः सफलतां प्राप्नुवन्ति ।
- उत्तमाङ्कान् लभमानाः छात्राः हसन्ति ।
10….उचित विकल्प चुनिये…
मुद् + शानच् बालकाय मोदकं यच्छ ।
(क) मोदमानः(ख) मोदमानाय(ग) मोदमानायै(घ) मोदमानय
सेव्+ शानच् जनाः स्वकर्तव्यं निर्वहन्ति ।
(क) सेवमानः (ख) सेवमानाः(ग) सेवामानानाम्(घ) सेवमानैः
गुरुं सेव् + शानचच् छात्रः प्रसन्नः भवति ।
(क) सेवानः (ख) सेवमानम् (ग) सेवमाना (घ) सेवमानः
वृध् + शानच् बालिकायै दुग्धं यच्छ ।
(क) वर्धमाना(ख) वर्धमानायै (ग) वर्धमानायाः (घ) वर्धमानम्
मुद् + शानच् बालिकायै पारितोषिकं यच्छ ।
(क) मोदमान(ख) मोदमानायै (ग ) मोदमानायाः (घ) मोदमानम्
रिक्त स्थान भरिये
- सेव् + शानच् = ______
- लभ् + शानच् = ______
- युध् + शानच् = ______
- यज् + शानच् = ______
- दीप् + शानच् =
शतृ प्रत्यय के लिये इसे पढिये.
णिनि-इनि प्रत्यय के लिये इसे देखिये..