संस्कृत व्याकरण में मतुप और वतुप प्रत्यय महत्वपूर्ण तद्धित प्रत्यय माने जाते हैं। इन प्रत्ययों का प्रयोग उस स्थिति में किया जाता है जब किसी वस्तु, व्यक्ति या स्थान में किसी गुण या वस्तु की उपस्थिति या अधिकार व्यक्त करना हो।
सरल शब्दों में, जब यह बताना हो कि किसी के पास कोई वस्तु या गुण है, तब इन प्रत्ययों का प्रयोग किया जाता है।
हिन्दी में जो अर्थ –वान, –वाला, –वाली जैसे शब्दों से व्यक्त होता है, वही अर्थ संस्कृत में सामान्यतः मतुप् प्रत्यय से प्रकट होता है।
उदाहरण
बल + मतुप् → बलवान्
अर्थ – जो बल से युक्त हो।
इसी प्रकार —
सः बलवान् अस्ति।
अर्थ – वह शक्तिशाली है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि मतुप् प्रत्यय का प्रयोग केवल संज्ञा और सर्वनाम शब्दों के साथ होता है, धातुओं के साथ इसका प्रयोग नहीं किया जाता।
आचार्य पाणिनि के अनुसार अर्थ
मतुप् प्रत्यय के अर्थ को पाणिनि ने दो प्रकार से समझाया है —
1. अस्य अस्ति (इसके पास है)
इस अर्थ में किसी वस्तु के अधिकार या स्वामित्व का भाव व्यक्त होता है।
उदाहरण
धनवान् = धनं अस्ति अस्य
अर्थ – जिसके पास धन है।
2. अस्मिन् अस्ति (इसमें है)
इस अर्थ में किसी वस्तु के भीतर किसी अन्य वस्तु की उपस्थिति बताई जाती है।
उदाहरण
जलवान् घटः
अर्थ – जल से भरा हुआ घड़ा।
मतुप् प्रत्यय से युक्त शब्द विशेषण बन जाते हैं।जैसे..गुणवती स्त्री। शक्तिमान् जनः।
मतुप और वतुप प्रत्यय के प्रयोग के नियम
मतुप् प्रत्यय के प्रयोग में कभी मत् और कभी वत् रूप मिलता है। यह शब्द के अंतिम अक्षर पर निर्भर करता है।
1. जब शब्द के अन्त में अ या आ को छोड़कर अन्य स्वर हो तो…
ऐसे शब्दों के साथ मतुप् का मत् रूप जुड़ता है।
मतुप् लगने पर उ और प् का लोप हो जाता है और केवल मत् बचता है।
उदाहरण
बुद्धि + मतुप् → बुद्धिमत्
शक्ति + मतुप् → शक्तिमत्
2. जब शब्द के अन्त में अ, आ या स् हो तो..
ऐसे शब्दों के साथ वतुप् का वत् रूप जुड़ता है।
उदाहरण
- धन + मतुप् → धनवत् (शब्द के अन्त में अ है )
- विद्या +मतुप् -विद्यावान
- विद्वस् +मतुप् -विद्वान्
3. यदि शब्द का उपधा वर्ण “म्” हो (उपधा वर्ण अर्थात… Second last वर्ण)
कभी-कभी शब्द का अन्तिम अक्षर स्वर होने पर भी वत् लगता है, यदि उसके पहले का अक्षर म् हो।
उदाहरण
लक्ष्मी + वतुप् → लक्ष्मीवान्… यहां लक्ष्मी इस शब्द में अन्तिम वर्ण ई है, परन्तु उसके पहले का वर्ण म् है अतः लक्ष्मी +वतुप् = लक्ष्मीवान् रूप बनेगा। अन्तिम वर्ण ई के आधार पर मत् नहीं होगा।
मतुप और वतुप प्रत्यय से बनने वाले रूप
जब शब्द में मत् जुड़ता है तब —
- पुल्लिङ्ग → मान्
- स्त्रीलिङ्ग → मती
- नपुंसक लिङ्ग → मत्
उदाहरण
बुद्धिमान् – बुद्धिमती – बुद्धिमत्
जब शब्द में वत् जुड़ता है तब —
- पुल्लिङ्ग → वान्
- स्त्रीलिङ्ग → वती
- नपुंसक लिङ्ग → वत्
उदाहरण
धनवान् – धनवती – धनवत्
विशेषण के रूप में प्रयोग
मतुप् या वतुप् प्रत्यय से बने शब्द सामान्यतः विशेषण होते हैं। इसलिए उनका लिङ्ग, वचन और विभक्ति उस शब्द के अनुसार बदलता है जिससे वे सम्बन्ध रखते हैं। अर्थात….क्योंकि इस प्रत्यय से बने शब्द विशेषण होते हैं ,अतः इन शब्दों के लिंग वचन और विभक्ति अपने विशेष्य के अनुसार होते हैं ।
उदाहरण
धनवान् नरः
यहाँ “नरः” पुल्लिङ्ग एकवचन है, इसलिए “धनवान्” भी पुल्लिङ्ग एकवचन में है।
जैसे..धनवान् नरः। इस वाक्य में नरः पुलिङ्ग् एक वचन में है, अतः धनवान् पद भी पुलिङ्ग् एक वचन में प्रयुक्त हुआ है।
नोट….इस प्रत्यय से बने शब्दों में कारक विभक्तियां लगती हैं , अर्थात इनके रूप बनते हैं।
मतुप् प्रत्यय से बने शब्दों के रूप, पुलिङ्ग् में भवत् की तरह स्त्रिलिङ्ग् में नदी की तरह तथा नपुंसक लिङ्ग में जगत् की तरह बनते हैं।
पुलिङ्ग रूप..
| भवान् | भवन्तौ | भवन्तः |
| श्रीमान् | श्रीमन्तौ | श्रीमन्तः |
स्त्रिलिङ्ग् रूप.
| नदी | नद्यौ | नद्यः |
| श्रीमती | श्रीमत्यौ | श्रीमत्यः |
नपुंसक लिङ्ग रूप..
| जगत् | जगती | जगन्ति |
| श्रीमत् | श्रीमती | श्रीमन्ति |
मतुप और वतुप प्रत्यय परिचय
..मतुप् प्रत्यय से बने शब्द..
| शब्द +प्रत्यय | पुलिङ्ग | स्त्रिलिङ्ग | नपुंसकलिङ्ग |
| बुद्धि+मतुप् | बुद्धिमान् | बुद्धिमती | बुद्धिमत् |
| शक्ति | शक्तिमान् | शक्तिमती | शक्तिमत् |
| कीर्ति | कीर्तिमान् | कीर्तिमती | कीर्तिमत् |
| चक्षु | चक्षुमान् | चक्षुमती | चक्षुमत् |
| भानु | भानुमान् | भानुमती | भानुमत् |
| अन्शु | अन्शुमान् | अन्शुमती | अन्शुमत् |
| दीप्ति | दीप्तिमान् | दीप्तिमती | दीप्तिमत् |
| धृति | धृतिमान् | धृतिमती | धृतिमत् |
| इक्षु | इक्षुमान् | इक्षुमती | इक्षुमत् |
| श्री | श्रीमान् | श्रीमती | श्रीमत् |
| नीति | नीतिमान् | नीतिमती | नीतिमत् |
| धी | धीमान् | धीमती | धीमत् |
| अग्नि | अग्निमान् | अग्निमती | अग्निमत् |
| ध्वनि | ध्वनिमान् | ध्वनिमती | ध्वनिमत् |
| ह्री | ह्रीमान् | ह्रीमती | ह्रीमत् |
| नदी | नदीमान् | नदीमान् | नदीमत् |
| इक्षु | इक्षुमान् | इक्षुमती | इक्षुमत् |
| मधु | मधुमान् | मधुमती | मधुमत् |
| वसु | वसुमान् | वसुमती | वसुमत् |
| विधु | विधुमान् | विधुमती | विधुमत् |
| सानु | सानुमान् | सानुमती | सानुमत् |
| हनु | हनुमान् | हनुमती | हनुमत् |
| वधू | वधूमान् | वधूमती | वधूमत् |
| गो | गोमान् | गोमती | गोमत् |
| गरुत् | गरुत्मान् | गरुत्मती | गरुत्मत् |
| धनुष् | धनुष्मान् | धनुष्मती | धनुष्मत् |
| ककुद् | ककुद्मान् | ककुद्मती | ककुद्मत् |
मतुप् /वतुप् प्रत्यय….वाक्य..
मतुप् प्रत्यय युक्त शब्दों को वाक्य में प्रयोग करते समय यह देखना चाहिये की वाक्य में विशेष्य शब्द कौन सा है…अर्थात किस लिङ्ग, वचन और विभक्ति में है,उसी के अनुसार मतुप् प्रत्यय से बने शब्द का भी लिङ्ग, विभक्ति व वचन होगा।
- 1..अध्ययेन नरः गुणवान् भवति।
- 2..श्रद्धवान् लभते ज्ञानः।
- 3..धनवान् नरः दानेन् शोभते।
- 4..बुद्धिमान् जनः सर्वत्र मानं लभते।
- 5..छायावन्तः वृक्षाः मार्गे पथिकेभ्यःआश्रयं यच्छन्ति।इस वाक्य में वृक्षाः बहुवचन में है,अतः छायावन्तः भी बहुवचन में प्रयुक्त हुआ ।
- 6..बलवती हि आशा
नोट…इस वाक्य में आशा स्त्रिलिङ्ग् का शब्द है, इसलिये बलवती भी स्त्री लिङ्ग में है।
- 7..पुरा एकः शक्तिमान् नृपः आसीत्।
- 8..तस्य नीतिमान् मन्त्री आसीत्।
- 9..धनवान् मन्त्री विपुलं धनं अयच्छत्।
- 10..बुद्धिमती नारी विचारशीला भवति।
- 11..अयम् वृक्षः फलवान् अस्ति।
- 12..वीराः अभ्युदये क्षमावन्तः भवन्ति।
- 13..इयं कन्या गुणवती अस्ति।
- 14..वयम् श्रीमन्तं मुख्यातिथिम् नमामः। इस वाक्य में मुख्यातिथिम् द्वितीया विभक्ति एक वचन में है, अतः श्रीमन्तं भी द्वितीया विभक्ति एक वचन में प्रयुक्त हुआ है।
प्रश्न -उत्तर
1.. प्रश्न.. रिक्त स्थानानि पूरयत…
(क) अध्यापकः ……………………. (बुद्धि +मतुप् )छात्राः! संसारे अस्मिन् कः श्रेष्ठः?
(ख ) राघवः – आचार्य! यः…….. (धन + मतुप् ) …….. (रूप +मतुप् ) जनः भवति, जनाः तम् एव श्रेष्ठं मन्यते।
(ग )इंदु:- अहं वदामि… यः……. (सदाचार +मतुप् )……. विवेकी,…….. ( नीति +मतुप्,.)………., (शक्ति +मतुप् ) च भवति, सः श्रेष्ठः भवति।
उत्तर… क… बुद्धिमन्तः ( छात्राः बहुवचन में है अतः बुद्धिमन्तः होगा )
ख… धनवान , रूपवान,
ग.. सदाचारवान , नीतिमान , शक्तिमान
2प्रश्न.. धृति +मतुप् =?
क..धैर्यवान ख.. धैर्यमान ग.. धृतिमान
उत्तर…धृतिमान
3..प्रश्न कृपा +मतुप् =?
क.. कृपामान, ख…कृपावान
उत्तर… कृपावान
4.. प्रश्न.. (छाया +मतुप् =?)वृक्षाः मार्गे श्रान्त पथिकेभ्यः आश्रयं यच्छन्ति?
क.. छायावान्, ख.. छायावन्तः, ग.. छायावन्तं, घ.. छायावतः
उत्तर.. ख..छायावन्तः
अनीयर प्रत्यय के लिये इसे देखिये..
अनीयर प्रत्यय के लिये इसे पढिये..
संस्कृत संज्ञा विधायक सूत्र के लिये देखिये
…….निम्न लिखित प्रश्नों को आप स्वयं करें….
निम्न शब्दों में मतुप् / वतुप् प्रत्यय लगाकर तीनों लिङ्गों के रूप बनाइए
- बुद्धि
- शक्ति
- कीर्ति
- नीति
- धन
- बल
- मधु
- श्री
- वसु
- धृति
2. निम्न शब्दों से मतुप् / वतुप् प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए
- फल
- गुण
- तेजस्
- ज्ञान
- धैर्य
- बुद्धि
- मधु
- श्री
- बल
- धन
3. रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए
- श्रद्धावान् ______ ज्ञानम्।
- ______ नरः दानेन शोभते।
- बुद्धिमान् ______ सर्वत्र मानं लभते।
- अयं वृक्षः ______ अस्ति।
- इयं कन्या ______ अस्ति।
4.सही उत्तर चुनिए
- “धनवान्” शब्द में कौन सा प्रत्यय लगा है?
(क) मतुप्
(ख) वतुप्
(ग) क्त
(घ) तव्यत् - “बुद्धिमान्” शब्द किस शब्द से बना है?
(क) बुद्धि
(ख) बुद्ध
(ग) बुद्धिम
(घ) बुद्धता - “श्रीमती” शब्द का पुल्लिङ्ग रूप क्या होगा?
(क) श्रीमान्
(ख) श्रीमत्
(ग) श्रीमन्तः
(घ) श्रीमती