Class 9 Sanskrit Chapter 1Solutions ‘सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्’ के सभी प्रश्न-उत्तर, अभ्यास प्रश्न का समाधान ।
१. छात्राः मिलित्वा पृथक् पृथक् पञ्चानां छात्राणां लघुसमूहान् निर्माय यति-गति-लयपूर्वकं गीतगानस्य अभ्यासं करिष्यन्ति ।
(छात्र मिलकर पाँच-पाँच के छोटे-छोटे समूह बनाकर लय, गति और ताल के साथ गीत गाने का अभ्यास करेंगे।)
उत्तर… छात्र स्वयं करेंगे।
२. एकपदेन उत्तरं लिखत –
(एक शब्द में उत्तर में लिखो…)
यथा – ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं किम् ?
(ज्ञानरूपी प्रकाश को दिखाने वाला क्या है? — )
उत्तर…’संस्कृतम्’ (संस्कृत है।)
(क) संस्कृतं कस्याः साधकम् ?
(संस्कृत भाषा किसकी साधक है?)
उत्तर..भारतियैकातायाः।
(संस्कृत भाषा भारतीय एकता की साधक है।)
(ख) सर्वदा संस्कृतं कस्य सन्दोहदम् ?…………
(संस्कृत भाषा सदैव किसका भण्डार देने वाली है ?)
उत्तर… आनन्दस्य।
(संस्कृत भाषा सदैव आनन्द का भण्डार देने वाली है।)
(ग) संस्कृतं कस्य प्रेरणादायकम् ?
(संस्कृत भाषा किसके लिए प्रेरणा देने वाली है?)
उत्तर.. सत्पथस्य।
(संस्कृत भाषा सत्पथ के लिए प्रेरणादायक है।)
(घ) संस्कृतं कासां परिष्कारकम् ?………..
(संस्कृत भाषा किनका परिष्कार करने वाली है?)
उत्तर…सर्ववाणीनाम्।
(संस्कृत भाषा सभी वाणियों का परिष्कार करने वाली है।)
(ङ) कस्य विस्तारकं संस्कृतम् ?…….
(संस्कृत भाषा किसका विस्तार करने वाली है?)
उत्तर… विश्वबन्धुत्वस्य।
(संस्कृत भाषा विश्व बन्धुत्व का विस्तार करने वाली है।)
पूर्ण वाक्येन उत्तरत्..
३. अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखत –
(निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर पूर्ण वाक्य में लिखो )
(क) सर्वतः कस्याः संस्थापकं संस्कृतम् ?
(संस्कृत भाषा चारों ओर किसकी स्थापना करने वाली है?)
उत्तर…सर्वतः शान्तेः संस्थापकं संस्कृतम्।
(संस्कृत भाषा सर्वत्र शान्ति की स्थापना करने वाली है।)
(ख) कीदृशं व्रतं संस्कृतम् ?
(संस्कृत भाषा किस प्रकार का व्रत है?)
उत्तर..त्याग संतोष सेवा व्रतं संस्कृतं।
(संस्कृत भाषा त्याग, सन्तोष और सेवा रूपी व्रत है।)
(ग) कयोः सम्मेलनं संस्कृतम् ?
(संस्कृत भाषा किनका संगम है?)
उत्तर… संस्कृतं ज्ञानविज्ञानयोः सम्मेलनम् अस्ति।
(संस्कृत भाषा ज्ञान और विज्ञान का संगम है।)
(घ) संस्कृतं कस्य चमत्कारकम् ?
(संस्कृत भाषा किसका चमत्कार करने वाली है?)
उत्तर.. विश्वस्य चेतसः चमत्कारकं अस्ति।
(संस्कृत भाषा विश्व के मन (चेतना) को चमत्कृत करने वाली है।)
(ङ) केषां यशः स्मारकं संस्कृतम् ?
(संस्कृत भाषा किनके यश का स्मारक है?)
उत्तर.. अस्माकं पूर्वजानां यशस्मारकं अस्ति।
(संस्कृत भाषा हमारे पूर्वजों के यश का स्मारक है।)
४. रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –
(रिक्त स्थान की पूर्ति करो..)
यथा – सर्वभूतैकता-कारकं संस्कृतम्।
- (क)…….. सम्पादकं संस्कृतम्।
- (ख)……. दर्शकं संस्कृतम्।
- (ग)……….संस्कारकं संस्कृतम् ।
- (घ) कर्मदं……… भक्तिदं संस्कृतम्।
- (ङ) सत्यनिष्ठं……….. संस्कृतम्।
- (च) शब्दलालित्य………..संस्कृतम्।
उत्तर….
- (क)भारतीयत्वं सम्पादकं संस्कृतम्।
- (ख)…ज्ञानपुञ्जप्रभा दर्शकं संस्कृतम्।
- (ग)……सर्वमस्तिष्क ….संस्कारकं संस्कृतम् ।
- (घ) कर्मदं……ज्ञानदं … भक्तिदं संस्कृतम्।
- (ङ) सत्यनिष्ठं…शिवम् सुन्दरं …….. संस्कृतम्।
- (च) शब्दलालित्य……लीलावनम् …..संस्कृतम्।
Class 9 Sanskrit Chapter 1Solutions सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् – प्रश्न-उत्तर
वाक्य निर्माण
५. मञ्जूषायाः पदानि उपयुज्य षड् वाक्यानि रचयत-
(मञ्जूषा में दिये गये पदों का उपयोग करके6वाक्य बनाओ)
( मञ्जूषा….वाणीपरिष्कारिका, एकता, सर्वतः, सेवा, सुन्दरम्, पूर्वजानाम्, सत्पथे प्रेरयितुम्, विश्वकल्याणाय, त्यागस्य, सन्तोषस्य, विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्)
यथा – वाणीपरिष्कारिका संस्कृत भाषा भवति ।
उत्तर….
- (क)संस्कृत भाषा विश्वबन्धुत्व वर्धयति ।
- (ख) संस्कृतं पूर्व जनानां यश: स्मारकं अस्ति।
- (ग) संस्कृतं सत्पथे प्रेरयितुं पूर्णतया समर्थम् अस्ति।
- (घ) संस्कृतं सर्वतः शान्ति संस्थापकं अस्ति।
- (ङ)संस्कृतं विश्वकल्याणाय निष्ठायुक्तं अस्ति।
- (च)त्यागस्य, सन्तोषस्य व्रतं संस्कृतेन लभ्यः।
६. अधोलिखितानां समस्तपदानाम् उदाहरणानुसारं विग्रहं कुरुत-
(नीचे लिखे गये सामासिक पदों का उदाहरण के अनुसार विग्रह करो )
यथा – भारतीयैकतासाधकम् ➡️ ‘भारतीयैकतायाः साधकम्।
- (क) ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकम्
- (ख) सर्ववाणीपरिष्कारकम्
- (ग) विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्
- (घ) सर्वभूतैकताकारकम्
- (ङ) शान्तिसंस्थापकम्
- (च) ज्ञानविज्ञानसम्मेलनम्
उत्तर..
- (क) ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकम् ……..ज्ञानस्य पुन्जः तस्य प्रभायाः दर्शकं
- (ख) सर्ववाणीपरिष्कारकम्……… सर्ववाणीनाम् परिष्कारकं
- (ग) विश्वबन्धुत्वविस्तारकम्………. विश्वबन्धुत्वस्य विस्तारकं
- (घ) सर्वभूतैकताकारकम्………… सर्वभूतैकतायाः कारकं
- (ङ) शान्तिसंस्थापकम्…………….शान्तेः संस्थापकं
- (च) ज्ञानविज्ञानसम्मेलनम् ……….. ज्ञानविज्ञानयोः सम्मेलनम्
Class 9 Sanskrit Chapter 1Solutions सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् – प्रश्न-उत्तर
७. प्रदत्तमञ्जूषातः पर्यायपदानि चित्वा रिक्तस्थाने लिखत –
(दी गई मञ्जूषा से पर्याय पद चुन कर रिक्त स्थानों पर लिखो..)
उल्लासः, किरणः, जगत्, अनुपमा, तेजोराशयः, मानम्
- (क) विद्वांसः………… भवन्ति ।
- (ख) सूर्यस्य ……….. सर्वेषां प्राणिनां कृते हितकरः भवति।
- (ग) ईश्वरे स्मृत्वा………उपजायते।
- (घ) विद्यायाः ………… अजरं भवति ।
- (ङ) प्रकृतेः शोभा………. विद्यते।
- (च) यत्र ………… एकनीडं भवति।
उत्तर…
- (क) विद्वांसः…तेजोराशयः ……… भवन्ति ।
- (ख) सूर्यस्य ……किरणः ….. सर्वेषां प्राणिनां कृते हितकरः भवति।
- (ग) ईश्वरे स्मृत्वा…उल्लासः ……उपजायते।
- (घ) विद्यायाः ……मानम् …… अजरं भवति ।
- (ङ) प्रकृतेः शोभा…अनुपमा ……. विद्यते।
- (च) यत्र ……जगत् …… एकनीडं भवति।
८. अधोलिखितानां मेलनं कुरुत –
(निम्न लिखित शब्दों को सही शब्दों से मिलाओ )
(क) भारतीयैकतायाः ……….. १ विस्तारकम्
(ख) सत्पथे ……….. २ साधकम्
(ग) त्यागसन्तोषसेवारूपम् ……… ३. दर्शकम्
(घ) ज्ञानपुञ्जप्रभायाः ……….. ४ प्रेरणादायकम्
(ङ) विश्वबन्धुत्वस्य ……….. ५ व्रतम्
उत्तर….
(क) भारतीयैकतायाः …………... २ साधकम्
(ख) सत्पथे ……………………. ४ प्रेरणादायकम्
(ग) त्यागसन्तोषसेवारूपम् ……… ५ व्रतम्
(घ) ज्ञानपुञ्जप्रभायाः ………….. ३. दर्शकम्
(ङ) विश्वबन्धुत्वस्य ………………१ विस्तारकम्
पञ्चशीलं किम् ? पञ्च शील क्या है?
बौद्धधर्मे सदाचरणस्य परिपालनाय पञ्च शीलानि सन्ति। येषामाचरणं मनुष्याणाम् अत्यन्तं लाभाय अस्ति। तेषां विवरणमस्ति –
बौद्ध धर्म में सदाचार के पालन के लिये पञ्चशील सिद्दान्त हैं। जिनके आचरण से मनुष्य को बहुत लाभ होता है। ये सिद्धान्त निम्नलिखित हैं….
- १. अस्तेयम् =चोरी न करना
- २. अहिंसा=हिंसा न करना
- ३. ब्रह्मचर्यम्= ब्रह्मचर्य पालन करना, व्यभिचार से बचना
- ४. सत्यम्= सत्य बोलना
- ५. मादकद्रव्याणां परिहारः= नशा न करना
एतद्देशप्रसूतस्य सकाशादग्रजन्मनः ।
स्वं स्वं चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां सर्वमानवाः ॥1।।
हिन्दी अनुवाद.इस देश (भारत) में जन्मे श्रेष्ठ पुरुषों (विद्वानों) के पास जाकर, पृथ्वी के सभी मनुष्यों को अपने-अपने योग्य आचरण और चरित्र की शिक्षा सीखनी चाहिए।”
संस्कृतं संस्कृतेर्मूलं ज्ञानविज्ञानवारिधिः ।
वेदतत्त्वार्थसंजुष्टं लोकाऽऽलोककरं शिवम् ॥2।।
हिन्दी अनुवाद…संस्कृत की जड़ ज्ञान और विज्ञान का सागर है।यह वेदों के सच्चे अर्थों से परिपूर्ण है और समस्त लोकों के लिए शुभ है।
सत्याहिंसागुणैः श्रेष्ठा विश्वबन्धुत्वशिक्षिका।
विश्वशान्तिसुखाधात्री भारतीया हि संस्कृतिः।। 3।।
हिन्दी अनुवाद…..सत्य और अहिंसा के गुणों से श्रेष्ठ, विश्व बंधुत्व (आपसी भाईचारे) की शिक्षा देने वाली और संपूर्ण संसार में शांति व सुख की स्थापना करने वाली ही भारतीय संस्कृति है।यह श्लोक भारतीय संस्कृति की महानता को दर्शाता है, जो हमें पूरी दुनिया को अपना परिवार मानना और अहिंसा के मार्ग पर चलना सिखाती है।
Class 9 Sanskrit Chapter 1Solutions सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् – प्रश्न-उत्तर
सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
FAQ..
Q1. ‘सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्’ का अर्थ क्या है?
👉 संस्कृत भाषा सत्य, कल्याण और सुंदरता का प्रतीक है।
Q2. संस्कृत को विश्वबन्धुत्व की भाषा क्यों कहा जाता है?
👉 क्योंकि यह सभी को जोड़ने और एकता बढ़ाने का कार्य करती है।
Q3. संस्कृत का महत्व क्या है?
👉 यह ज्ञान, विज्ञान और संस्कृति का आधार है।
Class 9 Sanskrit Chapter 1 Hindi Anuvaad ‘सत्यं शिवम् सुन्दरं संस्कृतम्’