Class 9 Sanskrit Chapter 1 Hindi Anuvaad ‘सत्यं शिवम् सुन्दरं संस्कृतम्’ का यह Hindi Anuvaad विद्यार्थियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस पाठ में संस्कृत भाषा के महत्व, उसके ज्ञान-विज्ञान और भारतीय संस्कृति में उसके योगदान को सरल शब्दों में बताया गया है।
संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक धरोहर है, जिसमें हमारे पूर्वजों का अमूल्य ज्ञान संचित है। इस पाठ के माध्यम से यह स्पष्ट होता है कि संस्कृत का अध्ययन करने से मनुष्य सुसंस्कृत बनता है और अन्य भारतीय भाषाओं को समझने में भी सहायता मिलती है।
Sharda Class 9 Sanskrit Chapter 1 Hindi Anuvaad
पाठ…‘सत्यं शिवम् सुन्दरं संस्कृतम्’
संस्कृतं भारतदेशस्य सम्पदस्ति। अस्मिन् भारतीयानां ज्ञानवैभवं सञ्चितमस्ति । संस्कृताध्ययनेन मानवः सुसंस्कृतः भवति। भारतीयभाषाणां सुचारुरूपेण अध्ययनार्थं संस्कृतं नितराम् अपेक्षितम् अस्ति। संस्कृताध्ययनेन किं किं साधितं भवति इति विषयम् अधिकृत्य कविना सुन्दरं गीतं प्रस्तुतम्।
हिन्दी अनुवाद…संस्कृत भारत देश की संपत्ति है। इस भाषा में भारतीयों के ज्ञान का वैभव संचित है। संस्कृत के अध्ययन से मनुष्य सुसंस्कृत होता है। भारतीय भाषाओं को अच्छी तरह से पढ़ने और समझने के लिये संस्कृत अत्यन्त आवश्यक है। संस्कृत के अध्ययन से क्या क्या प्राप्त होता है, इस विषय को ध्यान में रख कर कवि द्वारा यह सुन्दर गीत प्रस्तुत किया गया है।
Class 9 Sanskrit Chapter 1 Hindi Anuvaad
‘सत्यं शिवम् सुन्दरं संस्कृतम्’
भारतीयैकतासाधकं संस्कृतम्
भारतीयत्वसम्पादकं संस्कृतम्
ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं संस्कृतम्
सर्वदानन्दसन्दोहदं संस्कृतम् ॥ १ ॥
शब्दार्थ…
- साधकं = सिद्ध करने वाली
- संपादकं =संपादक
- पुञ्ज =समूह / भण्डार
- प्रभा = प्रकाश
- सन्दोह=समूह
- दम् = देने वाली
अन्वय…संस्कृतम् भारतीयैकतासाधकं ( अस्ति)। संस्कृतम् भारतीयत्वसम्पादकं (अस्ति)।संस्कृतम् ज्ञानपुञ्जप्रभादर्शकं (अस्ति)।संस्कृतम् सर्वदानन्दसन्दोहदं (अस्ति )
हिन्दी अनुवाद…संस्कृत भारतीयों की एकता को स्थापित करने वाली भाषा है। यह भारतीयता को विकसित करने वाली है। यह ज्ञान के प्रकाश को प्रकट करने वाली तथा सदैव आनंद प्रदान करने वाली भाषा है।
भावार्थ…संस्कृत भाषा ज्ञान, एकता और आनंद का स्रोत है।
सर्वमस्तिष्कसंस्कारकं संस्कृतम्
सर्ववाणीपरिष्कारकं संस्कृतम्
सत्पथप्रेरणादायकं संस्कृतम्
सद्गुणग्रामसन्धायकं संस्कृतम् ॥ २ ॥
Sanskrit Class 9 Chapter 1 Hindi Anuvaad
शब्दार्थ..
- मस्तिष्क =बुद्धि / दिमाग
- संस्कारकम् =संस्कारित करने वाली
- सर्व =सबकी
- परिष्कारकं =शुद्ध करने वाली
- ग्राम = समूह
- सन्द्बायकम् = संधान करने वाली
अन्वय..सर्वमस्तिष्कसंस्कारकं (अस्ति)। संस्कृतं सर्ववाणीपरिष्कारकं (अस्ति)।संस्कृतं सत्पथप्रेरणादायकं (अस्ति)। संस्कृतं सत्पथप्रेरणादायकं (अस्ति)। संस्कृतं सद्गुणग्रामसन्धायकं (अस्ति)।
हिन्दी अनुवाद…. संस्कृत सभी मनुष्यों की बुद्धि को संस्कारित करने वाली है। सभी के वाणी को शुद्ध करने वाली है। सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा देने वाली है। यह सद्गुणों को विकसित करने वाली भाषा है।
भावार्थ… संस्कृत गुणों की सागर है।संस्कृत व्यक्ति के भीतर अच्छे गुणों का विकास करती है।
विश्वबन्धुत्वविस्तारकं संस्कृतम्
सर्वभूतैकताकारकं संस्कृतम्
सर्वतः शान्तिसंस्थापकं संस्कृतम्
पञ्चशीलप्रतिष्ठापकं संस्कृतम् ॥ ३ ॥
- शब्दार्थ…
- विश्व =संसार
- बन्धुत्व = भाईचारा
- विस्तारकं = विस्तार /फैलाने वाली
- सर्वभूत= सभी प्राणियों में
- पञ्चशील = उत्तम आचरण के पाँच सिद्धान्त
- प्रतिष्ठापकं = प्रतिष्ठित करने वाली
अन्वय…संस्कृतं विश्वबन्धुत्वविस्तारकं(अस्ति )।संस्कृतं सर्वभूतैकताकारकं (अस्ति )। सर्वतः शान्तिसंस्थापकं (अस्ति)। संस्कृतं पञ्चशीलप्रतिष्ठापकं (अस्ति)।
हिन्दी अनुवाद…संस्कृत संसार में भाईचारे की भावना का विस्तार करने वाली है। सभी प्राणियों में एकता स्थापित करती है। चारो ओर शान्ति का वातावरण बनाती है। संस्कृत उत्तम व्यवहार के पञ्चशील सिद्धान्त प्रतिष्ठित करने वाली है।
भावार्थ.. वसुधैव कुटुम्बकम की भावना बढ़ाने वाली है।
त्यागसन्तोषसेवाव्रतं संस्कृतम्
विश्वकल्याणनिष्ठायुतं संस्कृतम्
ज्ञानविज्ञानसम्मेलनं संस्कृतम्
भुक्तिमुक्तिद्वयोद्वेलनं संस्कृतम् ॥ ४॥
शब्दार्थ…
- युतं = युक्त
- भुक्ति = भोग
- उद्वेलनम् =उत्थान करने वाली
अन्वय…..संस्कृतं त्यागसन्तोषसेवाव्रतं (अस्ति)। संस्कृतं विश्वकल्याणनिष्ठायुतं (अस्ति)।सस्कृतं ज्ञानविज्ञानसम्मेलनं (अस्ति)। संस्कृतं भुक्तिमुक्तिद्वयोद्वेलनं( अस्ति )।
हिन्दी अनुवाद…संस्कृत त्याग, संतोष और सेवा भाव के व्रत वाली है। विश्व में सभी का मंगल और कल्याण हो, इस निष्ठा से युक्त है। संस्कृत ज्ञान और विज्ञान का संगम है। जीवन में भोग और मोक्ष दोनों मार्ग पर व्यक्ति की उन्नति करने वाली है।
संक्षेप में…संस्कृत त्याग, संतोष और सेवा का संदेश देती है। यह विश्व के कल्याण की भावना से युक्त है तथा ज्ञान और विज्ञान का संगम है। यह मनुष्य को भोग और मोक्ष दोनों मार्गों में उन्नति प्रदान करती है।
भावार्थ…संस्कृत जीवन को संतुलित और सार्थक बनाती है।
धर्मकामार्थमोक्षप्रदं संस्कृतम्
ऐहिकामुष्मिकोत्कर्षदं संस्कृतम्
कर्मदं ज्ञानदं भक्तिदं संस्कृतम्
सत्यनिष्ठं शिवं सुन्दरं संस्कृतम् ॥ ५ ॥
शब्दार्थ…
- प्रदम् = प्रदान करने वाली
- ऐहिक = इस लोक का
- अमुष्मिक = परलोक का
- उत्कर्षदम् = उन्नति देने वाली
- कर्मदं ज्ञानदं भक्तिदं=कर्म, ज्ञान, भक्ति देने वाली
- शिवम् =कल्याणकारी
अन्वय…संस्कृतं धर्मकामार्थमोक्षप्रदं (अस्ति)। संस्कृतं ऐहिकामुष्मिकोत्कर्षदं (अस्ति)। संस्कृतं कर्मदं ज्ञानदं भक्तिदं (अस्ति)। संस्कृतं सत्यनिष्ठं शिवं सुन्दरं (अस्ति)।
हिन्दी अनुवाद…संस्कृत धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष का साधन प्रदान करने वाली है। इस लोक और पर लोक में संस्कृत से ही उन्नति होती है। भक्ति करने, ज्ञान प्राप्त करने और कर्म करने के लिये संस्कृत मार्ग दिखाती है। संस्कृत सत्यनिष्ठा से युक्त, कल्याणकारी तथा सुन्दर भाषा है।
संक्षेप में….संस्कृत धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष प्रदान करने वाली है। यह इस लोक और परलोक दोनों में उन्नति देती है। यह कर्म, ज्ञान और भक्ति का मार्ग दिखाती है।
भावार्थ…संस्कृत जीवन के चारों पुरुषार्थों को प्राप्त करने का साधन है।
शब्दलालित्यलीलावनं संस्कृतम्
चारुमाधुर्यधारागृहं संस्कृतम्
विश्वचेतश्चमत्कारकं संस्कृतम्
पूर्वजानां यशः स्मारकं संस्कृतम् ॥ ६ ॥
शब्दार्थ…
- शब्दलालित्य = शब्दों की सुन्दरता, सरसता
- चारु =सुन्दर
- माधुर्य =मधुरता
- चेतः =मन
- समारकम् =याद कराने वाली
अन्वय…संस्कृतं शब्दलालित्यलीलावनं (अस्ति)।संस्कृतं चारुमाधुर्यधारागृहं (अस्ति)।संस्कृतं विश्वचेतश्चमत्कारकं (अस्ति)।संस्कृतं पूर्वजानां यशः स्मारकं (अस्ति)।
हिन्दी अनुवाद….संस्कृत शब्दों की सुन्दरता, सरसता का वन है। संस्कृत सुन्दरता और मधुरता का आनन्ददायक गृह है। संस्कृत संसार के मन को चमत्कृत करने वाली है। संस्कृत पूर्वजों की यशराशि को स्मरण कराने वाली भाषा है।
संक्षेप में…संस्कृत शब्दों की मधुरता और सुंदरता से युक्त है। यह मन को आनंदित करने वाली तथा पूर्वजों के यश का स्मरण कराने वाली भाषा है।
भावार्थ….संस्कृत भाषा सौंदर्य, माधुर्य और परंपरा की प्रतीक है।
Class 9 Sanskrit Chapter 1 Hindi Anuvaad
प्रश्न उत्तर…
प्रश्न 1: संस्कृत को भारत की संपत्ति क्यों कहा गया है?
उत्तर: क्योंकि इसमें भारतीयों के ज्ञान, संस्कृति और परंपराओं का विशाल भंडार संचित है।
प्रश्न 2: संस्कृत का अध्ययन करने से क्या लाभ होता है?
उत्तर: संस्कृत का अध्ययन करने से मनुष्य सुसंस्कृत बनता है और अन्य भाषाओं को समझने में सहायता मिलती है।
प्रश्न 3: संस्कृत किस प्रकार एकता स्थापित करती है?
उत्तर: संस्कृत सभी भारतीयों को एक सांस्कृतिक सूत्र में बांधकर एकता स्थापित करती है।
प्रश्न 4: संस्कृत किस प्रकार शांति स्थापित करती है?
उत्तर: यह भाईचारे और सद्भावना का संदेश देकर समाज में शांति स्थापित करती है।
प्रश्न 5: संस्कृत किन-किन पुरुषार्थों को प्रदान करती है?
उत्तर: धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष।
प्रश्न 6: संस्कृत को मधुर भाषा क्यों कहा गया है?
उत्तर: क्योंकि इसमें शब्दों की सुंदरता और मधुरता पाई जाती है।