वर्णों के विभिन्न उच्चारण स्थान कौन-कौन से हैं?मुख के भीतर कहां कहां से वर्णों का उच्चारण करते हैं..उन उच्चारण स्थानों के नाम क्या हैं?
संस्कृत भाषा में प्रत्येक वर्ण का उच्चारण मुख के किसी विशेष भाग से होता है। जिस स्थान के स्पर्श या सहयोग से किसी वर्ण की ध्वनि उत्पन्न होती है, उसे उस वर्ण का उच्चारण स्थान कहते हैं।
वर्णों के विभिन्न उच्चारण स्थान
| उच्चारण स्थान | वर्ण |
| कण्ठ | अ, आ, क, ख, ग, घ, ङ, ह, : |
| तालु | इ, ई, च, छ, ज, झ, ञ, य, श |
| मूर्धा | ऋ, ट, ठ, ड, ढ, ण, र, ष |
| दन्त | लृ, त, थ, द, ध, न, ल, स |
| ओष्ठ | उ, ऊ, प, फ, ब, भ, म |
| नासिका | ञ, म, ङ, ण, न |
| कण्ठतालु | ए, ऐ |
| कण्ठोष्ठ | ओ, औ |
| दन्तोष्ठ | व |
| जिह्वामूल | “ᳲ” |
इनका विवरण इस प्रकार है…
1..कंठ…(Throat)
- सूत्र….अकुहविसर्जनीयानामकंठ: …
- अर्थात अ, आ क, ख, ग, घ ङ, ह तथा विसर्ग (:)इनका उच्चारण स्थान कंठ है।
- इन वर्णों का उच्चारण करते समय, जिह्वा कण्ठ को स्पर्श करती है। ये वर्ण कण्ठ सेबोले जाते हैं,इस आधार पर ये वर्ण कंठ्य वर्ण (Gutteral)कहे जाते हैं।
2..तालु…( Palate)
- सूत्र..इचुयशानाम तालु:
- इ,ई च, छ , ज, झ,ञ, य तथा श इन वर्णों का उच्चारण स्थान तालु है।
- इनके उच्चारण करते समय जिह्वा मुख के ऊपरी चिकने भाग को स्पर्श करती है।इस कारण इन्हें तालव्य व्यंजन कहते हैं।
3..मूर्द्धा…(Roof Of The Mouth )
- ऋ टु रषाणांमूर्द्धा…
- ऋ , टवर्ग … ट, ठ, ड , ढ, ण , रऔर ष का उच्चारण स्थान मूर्द्धा है। इसलिए ये वर्ण मूर्धन्य कहे जाते हैं। इन वर्णों का उच्चारण करते समय, जिह्वा मुख के अन्दर ऊपर की ओर जो खुरदरा भाग है, उसे स्पर्श करती है। उस खुरदरे भाग को मूर्धा कहते हैं।
4..दन्त्य…(Teeth)
- सूत्र…लृ-तु-ल-सानाम् दन्ता:
- लृ, तवर्ग.… त, थ, द, ध, न, ल,तथा स का उच्चारण स्थान दंत होता है,इसलिए ये व्यंजन दंत्य कहे जाते हैं। इन वर्णों का उच्चारण करते समय जिह्वा दांतों का स्पर्श करती है।
5..ओष्ठ.(Lips)
- सूत्र..उ-पु-उपध्मानीयानाम्ओष्ठौ
- उ, ऊ पवर्ग अर्थात प, फ, ब, भ, म तथा उपध्मानीय ( विसर्ग के बाद आने वाले प, फ) व्यंजन का उच्चारण स्थान ओष्ठ है, इसलिए ये व्यंजन ओष्ठ्य कहे जाते हैं। इन वर्णों का उच्चारण करते समय जिह्वा के साथ दोनों ओष्ठ मिलते हैं।
👉निम्नलिखित व्यञ्जन उपधमानीय कहे जाते हैं..
- जब विसर्ग के बाद प या फ वर्ण रहते हैं, तब विसर्ग का उच्चारण पूरा न हो कर आधा होता है। जैसे.. तपः फलं इस शब्द में विसर्ग के बाद फ वर्ण आया है।ये वर्ण भी विसर्ग के ही रूप होते हैं।
6..नासिका (Nose)
- सूत्र..ञ-म-ङ-ण-नानां नासिका च ..
- ञ-म-ङ-ण-न अर्थात प्रत्येक वर्ग का पांचवां वर्ण तथा अनुस्वार(•) का उच्चारण स्थान नासिका भी है। इनके उच्चारणमें क्रमशः कण्ठ, तालु , मूर्धा , दन्त, और ओष्ठ… इन स्थानों के जिह्वा द्वारा स्पर्श के साथ , नासिका ( नाक) से उत्पन्न ध्वनि भी मिल जाती है , इसलिये ये व्यंजन नासिक्य या अनुनासिक (Nasals)कहे जाते हैं।
7..कंठ-तालु …(Throat-Palate)
- सूत्र..एदैतो: कंठतालु:
- ए, ऐ का उच्चारण स्थान कंठ तालु है।
- अ+ई=ए तथा अ+ए =ऐ। ये दो वर्णों से मिल कर बने हैं ए और औ, इसलिए इनका उच्चारण स्थान कंठ और तालु दोनों है। इनके उच्चारण में कण्ठ-तालु दोनों का प्रयोग होता है ,इसलिए इन्हें कंठतालव्य कहा जाता है।
8..कंठोष्ठ्य Throat-Lips)
- सूत्र…ओदौतो: कंठोष्ठम ..
- ओ तथा औ का उच्चारण स्थान कंठ ओष्ठ है । इनके उच्चारण करते समय कंठ और ओष्ठ दोनों का प्रयोग होता हैं। अतः ये व्यंजन कंठोष्ठ्य कहे जाते हैं।
9..दंतोष्ठ…(Teeth-Lips)
- सूत्र..वकारस्य दंतोष्ठम.
- व का उच्चारण स्थान दंत ओष्ठ है। व का उच्चारण करते समय ओष्ठ के साथ दंत का भी प्रयोग किया जाता है। इसलिए इसे दंतोष्ठ्य कहा जाता है।
10..जिह्वामूल..
- सूत्र….“जिह्वामूलीयस्य जिह्वामूलम् । ”
- अर्थात जिह्वा मूल का उच्चारण स्थान जिह्वा मूल है। जिह्वा का मूल स्थान अर्थात जिह्वा का सबसे पीछे का भाग होता है। अतः इन्हें जिह्वा मूल कहते हैं।
- जब क और ख के पहले विसर्ग हों, तो इनका उच्चारण आधे विसर्ग के समान होता है। इसका उच्चारण जिह्वा के मूल अर्थात सबसे पीछे से होता है।यह भी विसर्ग का ही एक भाग होता है।
- 👉इसे इस प्रकार समझिये कि,जब विसर्ग के बाद क और ख वर्ण होते हैं, तब अर्ध विसर्ग का उच्चारण होता है, और तब ये वर्ण जिह्वामूलीय कहे जाते हैं। जैसे प्रातःकाल, दुःख ..।
वर्णों के विभिन्न उच्चारण स्थान की तालिका

मुख के भीतर वर्णों के विभिन्न उच्चारण स्थान का चित्र

नोट.. वर्णों को उच्चारण करके स्वयं अनुभव करिये , कि वर्णों के उच्चारण स्थान कौन से हैं।
उच्चारण स्थान याद रखने की सरल ट्रिक
संस्कृत के मुख्य उच्चारण स्थानों को “क-ता-मू-द-ओ” से याद रखा जा सकता है—
- क = कण्ठ
- ता = तालु
- मू = मूर्धा
- द = दन्त
- ओ = ओष्ठ
अर्थात् वर्णों के प्रमुख उच्चारण स्थान हैं— कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त तथा ओष्ठ।
एक अन्य सरल क्रम है—
“कण्ठ से तालु, तालु से मूर्धा, मूर्धा से दन्त, दन्त से ओष्ठ”
इस क्रम को याद रखने से उच्चारण स्थानों का अनुक्रम आसानी से स्मरण हो जाता है।
निष्कर्ष
संस्कृत भाषा के शुद्ध उच्चारण के लिए वर्णों के उच्चारण स्थानों का ज्ञान अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक वर्ण का उच्चारण मुख के किसी विशेष भाग से होता है, जैसे कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ तथा नासिका आदि। उच्चारण स्थानों की जानकारी होने से वर्णों का सही एवं स्पष्ट उच्चारण किया जा सकता है। इसलिए संस्कृत व्याकरण के अध्ययन में वर्णों के विभिन्न उच्चारण स्थानों का विशेष महत्व है।
प्रश्न उत्तर..अभ्यास कार्य
- 1.निम्नलिखित वर्णों में तालव्य वर्ण कौन से हैं? ई, च, ज क, म
- 2.च् का उच्चारण स्थान क्या है?
- 3.ऋ, र् ष् ट ठ ड ढ इनका उच्चारण स्थान बताईये.
- 4.कण्ठ तालु वर्णों के नाम लिखो..
- 5..दन्तओष्ठ वर्ण कौन सा है?
- 6.जिह्वामूलीय वर्ण क्या है?
- 7.उपध्मानीय क्या है?
- 8.कण्ठओष्ठय वर्ण का नाम लिखो..
- 9..नासिक्य वर्णों के नाम लिखो.
- 10..य, श वर्ण का उच्चारण स्थान लिखो..
उत्तर
- 1..ई, च, ज
- 2..तालु
- 3..मूर्धा
- 4..ए, ऐ
- 5..व
- 6..यह भी विसर्ग का ही एक भाग होता है। जब क और ख के पहले विसर्ग हों, तो इनका उच्चारण आधे विसर्ग के समान होता है, और इस ध्वनि को जिह्वामूलीय कहते हैं। इसे इस प्रकार समझिये कि,जब विसर्ग के बाद क और ख वर्ण होते हैं, तब अर्ध विसर्ग क उच्चारण होता है, और ये वर्ण जिह्वामूलीय कहे जाते हैं। जैसे प्रातःकाल, दुःख ..। जिह्वा मूल का उच्चारण स्थान जिह्वा मूल है। जिह्वा का मूल स्थान अर्थात सबसे पीछे का भाग होता है। अतः इन्हें जिह्वा मूल कहते हैं।
- 7..जब विसर्ग के बाद प या फ वर्ण रहते हैं, तब विसर्ग का उच्चारण पूरा न हो कर आधा होता है। जैसे.. तपः फलं इस शब्द में विसर्ग के बाद फ वर्ण आया है।उपध्मानीय भी विसर्ग के ही रूप होते हैं।
- 8..ओ, औ
- 9..ञ, म,ङ, ण, न
- 10..तालु
णिनि इनि प्रत्यय प्रत्यय और उदाहरण
संस्कृत में वाच्य परिवर्तन के नियम
Sanskrit Sangya Vidhayak Sutra
शतृ प्रत्यय Introduction With Example
परीक्षोपयोगी अन्य प्रश्न
वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQ)
- ‘च’ वर्ण का उच्चारण स्थान क्या है?
- (क) कण्ठ
- (ख) तालु
- (ग) दन्त
- (घ) ओष्ठ
उत्तर: (ख) तालु
- ‘व’ वर्ण किस उच्चारण स्थान से बोला जाता है?
- (क) दन्तोष्ठ
- (ख) कण्ठ
- (ग) मूर्धा
- (घ) तालु
उत्तर: (क) दन्तोष्ठ
- कण्ठोष्ठ्य वर्ण कौन से हैं?
- (क) ए, ऐ
- (ख) ओ, औ
- (ग) य, श
- (घ) त, थ
उत्तर: (ख) ओ, औ
लघु उत्तरीय प्रश्न
- कण्ठ्य वर्ण किसे कहते हैं?
- तालव्य वर्णों के नाम लिखिए।
- मूर्धा का उच्चारण स्थान किन वर्णों का है?
- उपध्मानीय क्या है?
- जिह्वामूलीय किसे कहते हैं?
रिक्त स्थान भरिए
- ए तथा ऐ का उच्चारण स्थान ________ है।
- व का उच्चारण स्थान ________ है।
- तवर्ग के वर्ण ________ कहलाते हैं।
- पवर्ग के वर्ण ________ कहलाते हैं।
उत्तर:
- कण्ठतालु
- दन्तोष्ठ
- दन्त्य
- ओष्ठ्य
अन्य अभ्यास प्रश्न…
- (अ) अधोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि अधोदत्तेषु वर्णेष उचितं वर्णं चित्वा लिखत ।
(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर नीचे दिए गए वर्षों में से उचित वर्ण को चुनकर लिखिए।)
(Write the answers of the following questions by giving the following correct words.)
(i) च, छ, ज, झ, ञ, वर्णेषु कः वर्णः नासिक्यः अस्ति ?
- (क) च्
- (ख) ज्
- (ग) ज्
- (घ) झू
(ii) ‘घ्’ वर्णः अस्ति ?
- (क) मूर्धन्यः
- (ख) दन्त्यः
- (ग) कण्ठ्यः
- (घ) किमपि न
(iii) इ, छ, ऋ, य् एतेषु वर्णेषु कः वर्णः तालव्यः न अस्ति ?
- (क) ऋ
- (ख) इ
- (ग) य्
- (घ) छ
(iv) ‘स्, ब्, ण्’ वर्णेषु कः, वर्णः दन्त्यः अस्ति ?
- (क) ण्
- (ख) व्
- (ग) स्
- (घ) किमपि न
(v) ‘गजः’ इति शब्दे कस्य व्यञ्जनवर्णस्य उच्चारण-स्थानं कण्ठः अस्ति ?
- (क) ग्
- (ख):
- (ग) ज्
- (घ) किमपि न
(vi) ऐ, ओ, व् वर्णेषु कस्य उच्चारणस्थानं कण्ठोष्ठम् अस्ति ?
- (क) व्
- (ख) ओ
- (ग) ऐ
(आ) (1) वर्णविन्यासे अधो दत्तैः उचितैः वर्णैः रिक्तस्थानं पूरयत ।
(वर्ण-विन्यास में नीचे दिए गए उचित वर्षों से खाली स्थान भरिए।)
(Fill in the blanks in the arrangement of letters by following the correct letters.)
(i) कृपा – -क्+……..+ प् + आ
- (क) ऋ
- (ख) अ
- (ग) उ
- (घ) ए
(ii) प्रयत्नः —प्+…….+ अ + य् + अ + त् + न् + अः
- (क) य्
- (ख) र्
- (ग) व्
- (घ) ल्
(II) अधोलिखितेषु वर्णेषु उचितैः वर्णोः वर्णसंयोजनं क्रियताम् ।
(नीचे लिखे वर्षों में से शुद्ध वर्ण द्वारा वर्ण-संयोजन कीजिए।)
(Arrange the letters by the following correct letters.)
(i) श्+र्+अ++ध् + आ =…… द्धा
- (क) श
- (ख) श्र
- (ग) शृ
- (घ) श्रु
(ii) न् + अ + म् + र् + अ + त् + आ = न….. ता
- (क) म्र
- (ख) मृ
- (ग) म्रा
- (घ) मर
- (अ) अधोलिखितेषु प्रश्नानाम् उत्तराणि अधोदत्तैः उचितैः वर्णैः प्रदत्तस्थानेषु लिखत ।
(नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर नीचे दिए गए उचित वर्णों द्वारा दिए गए स्थानों में लिखिए।)
(Fill in the blanks in the arrangement of letters by following correct letters.)
(i) च्, तू, क्, एषु, कः वर्णः कण्ठाद् उच्चरितः भवति ?
- (क) क्
- (ख) च्
- (ग) त्
- (घ) किमपि न
(ii) ‘महेशः’ इतिपदे ‘श्’ वर्णस्य उच्चारणस्थानं अस्ति।
- (क) कण्ठः
- (ख) तालुः
- (ग) मूर्धा
- (घ) दन्ताः
(iii) ‘कृपा’ इत्यत्र कस्य वर्णस्य उच्चारणस्थानं मूर्धा अस्ति ?
- (क) आ
- (ख) क्
- (ग) ऋ
- (घ)प्
(iv) ज्, दृ, भ् वर्णेषु कः वर्णः दन्त्यः अस्ति ?
- (क) द्
- (ख) भ्
- (ग) ज्
- (घ) किमपि न
(v) ङ्ञ, म् वर्णेषु वर्णः नासिक्यः ओष्ठ्यः च।
- (क) इ
- (ख) व्
- (ग) म्
- (घ) किमपि न
(vi)……वर्णस्य उच्चारणस्थानम् ‘दन्तोष्ठम्’ अस्ति।
- (क) य्
- (ख) र्
- (ग) ल्
- (घ) व्
(आ) (1) अधोदत्तेषु वर्णेषु उचितैः वर्णैः वर्णविन्यासे रिक्तस्थानं पूरयत ।
(नीचे दिए गए वर्षों में से उचित वर्गों द्वारा वर्ण-विन्यास में रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए।)
(Fill in the blanks in the arrangement of letters by following the correct letters.)
(i) विद्यार्थी—– व् + इ +द् +……..आ+र् + थ् + ई
- (क) य्
- (ख) व्
- (ग) र्
- (घ) ल्
(ii) आशीर्वादः—–आ+श्+ई+ + व् + आ + द् + अः
- (क) ऋ
- (ख) र्
- (ग) व्
- (घ) ल्
(II) अधोदत्तेषु वर्णेषु उचितैः वर्णैः वर्णान् संयोज्य रिक्तस्थानं पूरयत।
(नीचे दिए गए वर्षों में से उचित वर्षों द्वारा वर्षों को जोड़कर खाली स्थान की पूर्ति कीजिए।)
(Fill in the blanks by joining the letters by following the correct letters.)
(i) द् + व् + आ + र् + इ + क् + आ =……….रिका
- (क) द्व
- (ख) द्वा
- (ग) द्वा
- (घ) द्वि
(ii) उज्ज्+ व् + अ + ल् + अ = उज् ……… वल
- (क) ल्
- (ख) र्
- (ग) ज्
- (घ) प्
- (अ) अधोदत्तेषु वर्णेषु उचितैः वर्णैः अघोलिखितप्रश्नानाम् उत्तराणि यथास्थानं लिखत।
(नीचे दिए गए उचित वर्णों द्वारा निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दिए गए स्थान में लिखिए।)
(Write the answers of the following questions in the space provided.)
(i) अ, इ, ए, वर्णेषु वर्णस्य उच्चारणस्थानं कण्ठतालुः अस्ति।
- (क) अ
- (ख) ए
- (ग) इ
- (घ) किमपि न
(ii) ‘स्”श्’ वर्णयोः कः वर्णः तालव्यः अस्ति ?
- (क) श्
- (ख) स्
- (ग) किमपि न
(iii) ‘ह’ वर्णस्य उच्चारणस्थानम् अस्ति –
- (क) तालुः
- (ख) कण्ठः
- (ग) मूर्धा
- (घ) दन्ताः
(iv) द्, त्, वर्णयोः ………वर्णः दन्त्यः ।
- (क) ट्
- (ख) किमपि न
- (ग) त्
(v) उ, प्, म् वर्णेषु कः वर्णः नासिक्यः अस्ति ? 1l
- (क) उ
- (ख) प्
- (ग) म्
- (घ) किमपि न
(vi) ‘शरद्’ इत्यत्र केवलं ………. वर्णस्य उच्चारणस्थानं मूर्धा अस्ति।
- (क) र्
- (ख) अ
- (ग) द्
- (घ) श्