निपात क्या होते हैं? परिभाषा, प्रकार और उदाहरण
हिन्दी व्याकरण में निपात ऐसे सहायक शब्द होते हैं जिनका प्रयोग वाक्य में किसी शब्द या कथन पर विशेष बल देने के लिए किया जाता है। ये शब्द स्वयं कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं रखते, बल्कि वाक्य के भाव को अधिक स्पष्ट और प्रभावपूर्ण बना देते हैं।
परिभाषा
वाक्य में प्रयुक्त ऐसे सहायक शब्द जो किसी शब्द के साथ आकर उसके अर्थ को विशेष बल प्रदान करते हैं, उन्हें निपात कहते हैं।
उदाहरण
- मैं आज विद्यालय जाऊँगा। (साधारण ढंग से साधारण वाक्य कहा गया है )
- मैं भी आज विद्यालय जाऊँगा। (अर्थात और लोग भी विद्यालय जायेंगे और सबके साथ में मैं भी )
- मैं ही आज विद्यालय जाऊँगा। (अर्थात केवल मैं ही जाऊंगा, और कोई नहीं )
इन वाक्यों में “भी” और “ही” निपात हैं। इनके प्रयोग से वाक्य के अर्थ में परिवर्तन आ जाता है।
निपात की विशेषताएँ
इन निपातों की कुछ मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं –
- निपात उस शब्द के बाद आता है जिस पर बल देना होता है।
- इनका कोई लिंग, वचन या कारक नहीं होता।
- इनके रूप में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता।
- ये अव्यय की तरह प्रयोग किए जाते हैं।
- निपात का अपना कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं होता, बल्कि यह वाक्य के भाव को स्पष्ट करता है।
निपात के स्थान से अर्थ परिवर्तन
वाक्य में निपात का स्थान बदलने से वाक्य का अर्थ भी बदल सकता है।
उदाहरण
- राम भी पुस्तक पढ़ रहा है।
- (अर्थ – अन्य लोग भी पढ़ रहे हैं)
- राम पुस्तक भी पढ़ रहा है।
- (अर्थ – अन्य कार्यों के साथ पुस्तक भी पढ़ रहा है)
पहले वाक्य में “भी” का बल “राम” पर है, जबकि दूसरे वाक्य में “पुस्तक” पर है।
निपात के प्रमुख कार्य
वाक्य में निपात का प्रयोग कई प्रकार से किया जाता है –
- प्रश्न पूछने के लिए
- अस्वीकार व्यक्त करने के लिए
- किसी शब्द पर बल देने के लिए
- वक्ता की भावना प्रकट करने के लिए
उदाहरण
1..सही बात हम भी नहीं जानते।
2..विद्यालय का कार्यक्रम आज ही होगा।
निपात के प्रकार
- स्वीकारार्थक निपात
- नकारार्थक निपात
- निषेधार्थक निपात
- प्रश्नार्थक निपात
- विस्मयबोधक निपात
- बलप्रदायक या सीमाबोधक निपात
- तुलनात्मक निपात
- आदरसूचक निपात
- अवधारणाबोधक निपात
- निर्देशार्थक निपात.
- ध्यानाकर्षक निपात..भर, केवल, मात्र सिर्फ
1.स्वीकारार्थक निपात
किसी बात को स्वीकार करने या पुष्टि करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण – हाँ, जी, जी हाँ
वाक्य
- हाँ, हम कल मन्दिर जायेंगे।
- जी हाँ, आपका कार्य पूरा हो गया है।
2.नकारार्थक निपात
किसी बात को अस्वीकार करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण – नहीं, न
वाक्य
1.मुझे यह कार्य पसंद नहीं है।
2.न, मैं इस बात से सहमत नहीं हूँ।
- निषेधार्थक निपात
किसी कार्य को करने से रोकने के लिए इनका प्रयोग होता है।
उदाहरण – मत
वाक्य
1.यहाँ मत बैठो।
2.उससे झगड़ा मत करो।
4..प्रश्नार्थक निपात
प्रश्न व्यक्त करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण – क्या, क्यों, न
वाक्य
1.क्या तुम आज विद्यालय जाओगे?
2.तुम आज विद्यालय जाओगे क्या?
5..विस्मयबोधक निपात
आश्चर्य, खुशी या दुःख व्यक्त करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण – क्या, काश
वाक्य
1.क्या सुंदर चित्र बनाया है!
2.काश मुझे भी यह अवसर मिलता।
6..बलप्रदायक या सीमाबोधक निपात
ये किसी शब्द या कथन पर विशेष बल देते हैं।
उदाहरण – ही, भी, तो, तक, केवल, मात्र
वाक्य
1.सीमा के पास एक ही पुस्तक है।
2.मैं भी तुम्हारे साथ चलूँगा।
7.तुलनात्मक निपात
तुलना या समानता व्यक्त करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण – सा
वाक्य
1.उसका चेहरा चाँद सा चमक रहा है।
2.बच्चे का मन फूल सा कोमल होता है।
8.आदरसूचक निपात
सम्मान व्यक्त करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण – जी
वाक्य
1.शर्मा जी आज विद्यालय आएंगे।
2..माता जी हमें समझा रही हैं।
9..अवधारणाबोधक निपात
किसी कार्य,स्थिति या मात्रा का संकेत करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण – ठीक, लगभग, करीब, तकरीबन
वाक्य
1.वह लगभग पाँच बजे घर पहुँचा।
2.हम करीब दो घंटे तक प्रतीक्षा करते रहे।
10..निर्देशार्थक निपात
किसी वस्तु या व्यक्ति की ओर संकेत करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
उदाहरण – लो, लीजिए
वाक्य
1.लो, तुम्हारी पुस्तक मिल गई।
2..लीजिए, यह आपका पत्र है।
11.ध्यानाकर्षक निपात..भर, केवल, मात्र सिर्फ
निष्कर्ष
उपरोक्त बताये गये निपात हिन्दी व्याकरण के महत्वपूर्ण सहायक शब्द हैं। इनका प्रयोग वाक्य के अर्थ को अधिक स्पष्ट, प्रभावशाली और भावपूर्ण बनाने के लिए किया जाता है। निपात स्वयं कोई स्वतंत्र अर्थ नहीं रखते, परन्तु इनके प्रयोग से वाक्य का भाव बदल जाता है और कथन अधिक प्रभावशाली बन जाता है।
निपात क्या होते हैं…कुछ विशेष बातें
दीमशित्स नें निपात के बारे में कहा है…” वाक्य में निपात के प्रयोग से उस वाक्य का समग्र अर्थ व्यक्त होता है।
आचार्य यास्क का मत…
“अथ निपाताः उच्चावचेषु अर्थेषु निपतन्ति ..अपि उपमार्थे। अपि कर्मोप संग्रहार्थे। अपि पद पूरणः”। अर्थात
“ निपात वे पद हैं जो कभी उपमा के अर्थ में कभी कर्मोपसंग्रह के अर्थ में , तो कभी पद पूरण के लिये , वाक्य में आवश्यकता के अनुसार प्रयोग किये जाते हैं “।निपात भी सार्थक वर्ण समुदाय हैं। ये संस्कृत भाषा में ज्यादातर प्रयोग किये जाते हैं।इन्हें तीन भागों में विभाजित किया गया है….
1..उपमनार्थक..इव, न, चित् तथा नु उपमा के लिये प्रयुक्त होते हैं।
2..कर्मोपसंग्रह..ये ऐसे निपात पद हैं जिनके आने से पृथकता का बोध होता है।ये दो या अधिक सामासिक पदों के बीच आ कर अर्थों की भिन्नता को निश्चित रूप से सूचित करते हैं। च , वा , अह , खलु , ह , किल, हि, ननु , नूनम् आदि।
पादपूरण…ये निरर्थक निपात कहे जाते हैं। ये किसी गद्य या पद्य में वाक्य पूर्ति या छन्द पूर्ति के लिये प्रयोग किये जाते हैं।अर्थात छन्दपूर्ति ही इनके प्रयोग का प्रयोजन होता है। कम्, इम् ,इत् , उ आदि इस प्रकार के निपात होते हैं।
निपात क्या होते हैं..प्रश्न-उत्तर
- 1..निपात किसे कहते हैं? इसके कितने भेद हैं?
- 2..निपात का दूसरा नाम क्या है?
- 3..निपात और अव्यय में क्या अन्तर है?
- 4..निपात के दस उदाहरण लिखिये..
- 5..निर्देशात्मक निपात क्या हैं?
- 6..आदर सूचक निपात के वाक्य लिखिये..
- 7..तुलनात्मक निपात क्या हैं?
- 8.निपात के क्या कार्य हैं?
उत्तर..
- 1..“वाक्य में प्रयुक्त ऐसे सहायक पद जो किसी पद (शब्द)के साथ आ कर उसके अर्थ को विशेष बल प्रदान करते हैं उन्हें, निपात कहते हैं “।
- 2..निपात का दूसरा नाम “अवधारक ” है।
- 3..वाक्य में अव्ययों का प्रयोग जब संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण आदि के साथ होता है, तब उनका अपना अर्थ होता है , परन्तु निपात का प्रयोग वाक्य में निश्चित शब्द या पूरे वाक्य को अर्थ छवि प्रदान करने के लिये होता है।
- 4..हां, जी, नहीं, मत, क्या, क्यों, काश , तो भी, भर, केवल, जी, ठीक, लगभग, सा, मात्र।
- 5..किसी वस्तु या व्यक्ति को इङ्गित करने वाले निपात निर्देशात्मक निपात हैं।जैसे..ले, लो आदि
- 6.. 1.गांधी जी को राष्ट्रपिता कहा जाता है। 2..पिता जी का फोन आया था।
- 7..इसका प्रयोग वाक्य में संज्ञा, सर्वनामों, विशेषण आदि के साथ तुलना , समानता, अनुरूपता व्यक्त करने के लिए होता है। इसके अन्तर्गत सा आता है।
- 8..निपात के कार्य..प्रश्न पूछना , अस्विकृति, वक्ता का कथन के प्रति भाव,तथा वाक्य में किसी शब्द पर बल देना आदि है।
अन्य अभ्यास प्रश्न भाग 2
- निपात किसे कहते हैं?
- निपात का मुख्य कार्य क्या होता है?
- क्या निपात का लिंग और वचन होता है?
- निपात के दो उदाहरण लिखिए।
- “मैं भी विद्यालय जाऊँगा।” इस वाक्य में निपात पहचानिए।
- “राम ही इस कार्य को कर सकता है।” इस वाक्य में निपात कौन सा है?
- नकारार्थक निपात के दो उदाहरण लिखिए।
- निषेधार्थक निपात कौन सा होता है?
- प्रश्नार्थक निपात के दो उदाहरण लिखिए।
- विस्मयबोधक निपात के दो उदाहरण लिखिए।
रिक्त स्थान भरिए
- वाक्य में किसी शब्द के अर्थ को विशेष बल देने वाले शब्द ______ कहलाते हैं।
- “मुझे यह कार्य पसंद ______ है।”
- “तुम आज विद्यालय जाओगे ______?”
- “यहाँ ______ आओ।”
- “मैं ______ तुम्हारे साथ चलूँगा।”
सही विकल्प चुनिए
- निपात का प्रयोग किसके लिए किया जाता है?
(क) वाक्य को लंबा बनाने के लिए
(ख) वाक्य के अर्थ को बल देने के लिए
(ग) शब्द को छोटा करने के लिए - निम्न में से कौन निपात है?
(क) पुस्तक
(ख) भी
(ग) विद्यालय - “मत” किस प्रकार का निपात है?
(क) निषेधार्थक
(ख) प्रश्नार्थक
(ग) स्वीकारार्थक - “क्या” किस प्रकार का निपात है?
(क) प्रश्नार्थक
(ख) नकारार्थक
(ग) आदरसूचक - “जी” किस प्रकार का निपात है?
(क) आदरसूचक
(ख) नकारार्थक
(ग) तुलनात्मक
भाग 2 : उत्तर
- वाक्य में प्रयुक्त ऐसे सहायक शब्द जो किसी शब्द के अर्थ को विशेष बल देते हैं, निपात कहलाते हैं।
- निपात का मुख्य कार्य वाक्य में किसी शब्द या कथन पर विशेष बल देना है।
- ही, भी
- नहीं, निपात का कोई लिंग और वचन नहीं होता।
- भी
- ही
- नहीं, न
- मत
- क्या, क्यों
- काश, क्या
रिक्त स्थानों के उत्तर
- निपात
- नहीं
- क्या
- मत
- भी
सही विकल्पों के उत्तर
- (ख) वाक्य के अर्थ को बल देने के लिए
- (ख) भी
- (क) निषेधार्थक
- (क) प्रश्नार्थक
- (क) आदरसूचक
पद परिचय परिभाषा भेद तथा उदाहरण