विशेषण की अवस्थाएं

विशेषण की अवस्थाएं हिन्दी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण विषय है। भाषा में जब हम किसी संज्ञा या सर्वनाम के गुण, दोष या विशेषता को बताते हैं, तब विशेषण का प्रयोग करते हैं। विशेषण भाषा और साहित्य का महत्वपूर्ण भाग है।

कई बार केवल गुण बताना पर्याप्त होता है, लेकिन कई बार दो या दो से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं के गुणों की तुलना भी की जाती है।

इसी तुलना को स्पष्ट करने के लिए विशेषण की अवस्थाएं (Degree of Adjective) प्रयोग की जाती हैं। इनके माध्यम से हम यह बता सकते हैं कि कोई वस्तु या व्यक्ति केवल गुण वाला है, किसी से अधिक है, या सभी में सबसे अधिक है।

हिन्दी तथा संस्कृत दोनों भाषाओं में विशेषण की अवस्थाएं तीन प्रकार की होती हैं – सामान्य अवस्था, उत्तरावस्था (तुलनात्मक अवस्था) और उत्तमावस्था। इन तीनों अवस्थाओं के माध्यम से वस्तुओं या व्यक्तियों के गुणों की तुलना स्पष्ट रूप से व्यक्त की जाती है।

इस लेख में हम विशेषण की अवस्थाएं, उनकी परिभाषा, प्रकार, उदाहरण तथा नियम को सरल भाषा में समझेंगे।

विशेषण की अवस्थाएं/ तुलनात्मक विशेषण/Visheshan Ki Avasthaen

वाक्य में विशेषण का प्रयोग तीन रूपों में दृष्टिगोचर होता है। इन्हें ही विशेषण की अवस्था (Degree))कहते हैं। ये तीन हैं…

  • 1.. सामान्य अवस्था/ मूल अवस्था (Positive Degree )
  • 2.. उत्तरावस्था (Comparative Degree)
  • 3.. उत्तमावस्था (Superlative Degree )

फिर वाक्य में तुलना करना किसे कहते हैं?

दो या दो से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं के गुण – दोष को एक दूसरे के सापेक्ष देखने को /मिलाने को तुलना करना कहते हैं।

परिभाषा…जिन विशेषण शब्दों के द्वारा दो या दो से अधिक विशेष्यों अर्थात व्यक्तियों या वस्तुओं के गुण अवगुण की तुलना की जाती है, उन्हें तुलनात्मक विशेषण कहते हैं।

Visheshan Ki Avasthaen..

1.सामान्य या मूल अवस्था..(Positive Degree)

जब विशेषण अपने साधारण रूप रूप में प्रयुक्त होता है, और उसमें किसी प्रकार की तुलना प्रकट नहीं होती है, तब वह सामान्य अवस्था में होता है। जैसे…

1..आकाश में काले बादल छाये हुए हैं। इस वाक्य में बादल का विशेषण काले है, जो सीधे व्यक्त हुआ है। किसी अन्य के गुण दोष से तुलना नहीं हुई है।

अन्य उदाहरण..

  • 2.. रहीम बुद्धिमान बालक है।
  • 3.. ये अमरूद मीठा हैं।
  • 4.. दुर्जन व्यक्ति, लोगों को हानि पहुंचाते हैं।
  • 5..मोक्षिता बहुत अच्छा नृत्य करती है।
  • 6.. कक्षा के सभी छात्र अनुशासित हैं।
  • 7.. उसने लाल वस्त्र पहने थे।
  • 8.. मेरा सारी मेहनत बेकार हो गई ।
  • 9.. सरदार वल्लभ भाई पटेल को लौह पुरुष कहा जाता है।
  • 10..राजस्थान पत्रिका एक प्रसिद्ध दैनिक समाचार पत्र है।

👉संस्कृत उदाहरण..

  • जैसे.. रमेशः रुग्णः बालकः अस्ति।
  • सः चतुरः अस्ति।
  • तस्य मनोवृत्तिः स्वस्था अस्ति।
  • महेशस्य मनः शान्तः अस्ति।

इस वाक्य में सुन्दरः, चतुरः, स्वस्था सामान्य रूप में प्रयुक्त हुआ है , ये केवल गुण बता रहे हैं। इसलिये यह विशेषण की सामान्य अवस्था है।

2.उत्तरावस्था/ तुलनात्मक अवस्था(Comparative Degree)

जब दो व्यक्तियों या वस्तुओं के बीच तुलना करके किसी एक को अधिक या कम बताया जाता है, तब उसे उत्तरावस्था कहते हैं।

👉 हिन्दी में तुलनात्मक अवस्था दिखाने के लिए प्रायः ये शब्द प्रयोग होते हैं – से , में, से कम, से अधिक , से बढकर , की अपेक्षा, वनिस्पत, के अलावा, की तुलना में आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है ।

जैसे..

  • 1.. कमला, मीरा से धीरे बोलती है।
  • 2.. इन दोनों में मोहन अधिक चतुर है।
  • 3.. पाण्डवों में भीम अधिक बलवान थे।
  • 4.. मेरा छोटा भाई महेश अयोध्या जायेगा।
  • 5.. मीठा पानी खारे पानी से अधिक उष्ण होता है।
  • 6.. उस दुकान पर एक से बढ़ कर एक वस्त्र हैं।
  • 7.. सिरस का फूल ढाक के फूल से अधिक कोमल होता है।
  • 8..दिनेश, मोहन से तेज दौड़ता है।
  • 9.. राधा सीता से छोटी है।
  • 10.. झूठ बोलने में क्षितिज,. मन्विथ से बढ़कर है।
  • 11..मुझे अंग्रेजी की अपेक्षा संस्कृत पढ़ना जादा अच्छा लगता है।
  • 12..आपके अलावा इसे कोई और नहीं पढ़ा सकता।

संस्कृत में तुलनात्मक अवस्था

👉संस्कृत में तुलनात्मक अवस्था बनाने के लिए सामान्यतः तर (तरप्) या ईयस् प्रत्यय लगाए जाते हैं।

जैसे.. रामः मोहनात् सुन्दरतरः अस्ति। इस वाक्य में राम और मोहन की तुलना की गई है तथा राम को मोहनसे ऊंचा दिखाया गया है। अतः यह विशेषण की उत्तरा अवस्था है।

  • 1..एतयोः कः प्रवीणतरः?
  • 2.. एतयोः क्षितिजः बलवत्तरः।
  • 3.. लोकोत्तराणां चेतांसि पुष्पादपि मृदुत्तराणि भवन्ति।
  • 4.. क्षारं जलं मधुरात् जलात् शीतलतरः भवति।
  • 5.. मम कनीयान् भ्राता इन्द्रजीतः इदं कार्यं करिष्यति।
  • 7.. शिकोहाबादात् वाराणसी प्रयागात् दूरतरा आसीत्।
  • 8..राम रावणयोः कः बलीयान् आसीत्?
  • 9.. पुष्पेन्द्रः रमेशात् चतुरतरः अस्ति।
  • 10.. सीता राधायाः स्थवीयसी अस्ति। ( सीता राधा से अधिक मोटी है)

विशेषण की अवस्थाएं

उत्तमावस्था (Superlative Degree)

जब दो से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं में किसी एक को सबसे अधिक या सबसे कम बताया जाता है, तब उसे उत्तमावस्था कहते हैं।

जैसे..1.. हमारे विद्यालय में हर्ष सबसे अच्छा लड़का है।

2.. आरुषी कक्षा में सबसे तेज है।

3.. प्रकृति ईश्वर की सुन्दरतम कृति है।

4.. लड़कों में सबसे शैतान बच्चे को बुलाओ।

5.. महापुरुषों का हृदय सबसे कोमल होता है।

6.. रघुवंश संस्कृत का सबसे अच्छा महाकाव्य है

7.. कालीदास कवियों में सर्वश्रेष्ठ थे। 8.. इस वन के सबसे ऊंचे पेड़ की शाखाओं पर पक्षी कलरव करते हैं।9.. स्त्रियों में सबसे क्रूर स्त्री कैकेयी की क्रूरता कौन नहीं जानता।

👉**संस्कृत में उत्तमावस्था दिखाने के लिये तम् या ईष्ठन प्रत्यय का प्रयोग होता है।

जैसे रामः सर्वेषु बालकेषु सुन्दरतमः अस्ति। इस वाक्य में सुन्दरतम में तम् प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, तथा सभी बालकों में राम का उत्कर्ष दिखाया गया है।

अन्य उदाहरण..

2..जनानां अपठितं जनम् अत्र आनय।

3..रामचरित्रमानसम् हिन्दी भाषायाम् श्रेष्ठतम् ग्रन्थं अस्ति।

4..अस्मिन् उद्याने विशालतमस्य वृक्षस्य छायायाम् पथिकाः विश्रामम् कुर्वन्ति।

5..पाणिनि वैयाकरणेषु श्रेष्ठः अस्ति।

6..गङ्गा विश्वस्य पवित्रतमा नदी अस्ति।

7.. एतेषां फलानाम् मधुरतमस्य फलस्य रसं मह्यं देहि।

8.. युष्मासु बलिष्ठाय बालकाय अहम पारितोषकं दास्यामि।

9.. कौशल्या दशरथस्य ज्येष्ठा राज्ञी आसीत्।

10.. काकः खगेषु / खगानाम् धूर्ततमः भवति।

11.. सहदेवः पाण्डवेषु कनिष्ठः आसीत्।

12.. एतेषु छात्रेषु प्रवीणतमस्य छात्रस्य नामः हर्षवर्धनः अस्ति।

संस्कृत भाषा में विशेषण की अवस्थाओं से सम्बन्धित कुछ नियम

जब दो वस्तुओं में तुलना की जाती है, तब संस्कृत में विशेषण के साथ तरप् (तर) या ईयस् प्रत्यय लगता है।

जिससे तुलना की जाती है, उस शब्द में पंचमी विभक्ति का प्रयोग होता है।

जैसे.. रामः मोहनात् चतुरतरः अस्ति। इस वाक्य में राम की तुलना मोहन से की गई है, अतःमोहन में पंचमी विभक्ति का प्रयोग हुआ है।

जब दो से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं में किसी एक की श्रेष्ठता या हीनता बताई जाती है, तब तम या इष्ठन प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है।

इस स्थिति में प्रायः सप्तमी विभक्ति का प्रयोग किया जाता है।

विशेषण का लिंग, वचन और विभक्ति उसके विशेष्य के अनुसार ही बदलते हैं।

जैसे.. नदीषु / नद्याम् पवित्रतमाम् नदीम् कः न जानाति? इस वाक्य में पवित्रतमाम् अपने विषेष्य नदीम् के अनुसार स्त्री लिङ्ग द्वितीया एक वचन का है।

जैसे…एतेषु छात्रेषु प्रवीणतमस्य छात्रस्य नामः हर्षवर्धनः अस्ति। इस वाक्य में हर्षवर्धन को छात्रों में प्रवीणतम बताया गया है, अतः छात्रेषु में सप्तमी विभक्ति का प्रयोग हुआ है।

तरप् , तम्, ईयस् तथा इष्ठन प्रत्ययों से युक्त विशेषणों के लिङ्ग विभक्ति तथा वचन अपने विषेष्यों के अनुसार होते हैं।

हिन्दी में विशेषण की अवस्थाओं के उदाहरण

👉हिन्दी भाषा में विशेषण की अवस्था दिखाने के लिये से अधिक और सबसे अधिक शब्दों का प्रयोग करके दिखाया जाता है। जैसे..

अच्छा से अधिक अच्छा सबसे अच्छा
तेज से अधिक तेज सबसे तेज
चतुर से अधिक चतुर सबसे चतुर
सुन्दर से अधिक सुन्दर सबसे सुन्दर
महान से अधिक महान सबसे महान
नया से अधिक नया सबसे नया
बडा से अधिक बडा सबसे बडा

हिन्दी भाषा में भी तर और तम प्रत्यय जोड कर उत्तराऔर उत्तमावस्था रूप बनाया जाता है। जैसे..

लघु लघुतर लघुत्तम्
चतुर चतुरतर चतुरतम
विशाल विशालतर विशालतम
उच्च उच्चतर उच्चतमतम
अधिक अधिकतर अधिकतम
मधुर मधुरतरमधुरतम
कठोर कठोरतरकठोरतम
कोमल कोमलतरकोमलतम
सुन्दर सुन्दरतरसुन्दरतम
न्यून न्यूनतरन्यूनतम
योग्य योग्यतरयोग्यतम
प्राचीन प्राचीनप्राचीनतम
नवीन नवीनतरनवीनतम
निकट निकटतरनिकटतम
प्रिय प्रियतरप्रियतम
निकृष्ट निकृष्टतरनिकृष्टतम
वृहत् वृहत्तरवृहत्तम
शुभ्र शुभ्रतरशुभ्रतम

संस्कृत संज्ञा विधायक सूत्र के लिये इसे पढिये..

विशेषण की अवस्थाएं..

प्रश्न…1..

तुलनात्मक विशेषण किसे कहते हैं?

2.. तुलनात्मक विशेषण की कितनी अवस्थाएं होती हैं?

3.. मोहन सबसे तेज दौड़ता है.. यह विशेषण की कौन सी अवस्था है?

4.. संस्कृत भाषा में तुलनात्मक विशेषणके लिये किन प्रत्ययों का प्रयोग होता है?

5.. विशेषण की उत्तरावस्था किसे कहते हैं?

6.. देशद्रोह निकृष्टतम कार्य है।इस वाक्य में निकृष्टतम इस शब्द में विशेषण की कौन सी अवस्था है?

7..आधुनिक संगीत से ,शास्त्रीय संगीत अधिक मधुर लगता है। यह विशेषण की किस अवस्था का उदाहरण है?

उत्तर..1.. दो या दो से अधिक वस्तु या व्यक्तियों के गुण या दोषों को परस्पर मिलाने को तुलनात्मक विशेषण कहते हैं।

2.. तीन अवस्थाएं होती हैं।

3..उत्तमावस्था

4.. तर, तमप् तथा ईष्ठन प्रत्यय।

5.. जब विशेषण के द्वारा किसी दो वस्तु या व्यक्ति की तुलना कर के उनमें से किसी एक को कम या अधिक दिखाया जाता है, तब इसे उत्तरावस्था कहा जाता है।

6.. उत्तमावस्था7.. उत्तरावस्था

अभ्यास प्रश्न (विशेषण की अवस्थाएँ)

प्रश्न 1. विशेषण की कितनी अवस्थाएँ होती हैं?

प्रश्न 2. सामान्य अवस्था किसे कहते हैं?

प्रश्न 3. तुलनात्मक अवस्था किसे कहते हैं?

प्रश्न 4. उत्तमावस्था किसे कहते हैं?

प्रश्न 5. “राम मोहन से लंबा है।” यह किस अवस्था का उदाहरण है?

प्रश्न 6. “सीता कक्षा में सबसे बुद्धिमान है।” यह किस अवस्था का उदाहरण है?

प्रश्न 7. “यह आम मीठा है।” यह किस अवस्था का उदाहरण है?

प्रश्न 8. हिन्दी में तुलनात्मक अवस्था दिखाने के लिए कौन-कौन से शब्द प्रयोग होते हैं?

प्रश्न 9. संस्कृत में तुलनात्मक अवस्था बनाने के लिए कौन-से प्रत्यय लगाए जाते हैं?

प्रश्न 10. संस्कृत में उत्तमावस्था बनाने के लिए कौन-से प्रत्यय लगाए जाते हैं?

प्रश्न 11. निम्न वाक्य में विशेषण की अवस्था बताइये –
“रवि मोहन से अधिक तेज है।”

प्रश्न 12. निम्न वाक्य में विशेषण की अवस्था बताइये –
“गीता हमारी कक्षा की सबसे होशियार छात्रा है।”

प्रश्न 13. “मोहन चतुर है।” यह किस अवस्था का उदाहरण है?

प्रश्न 14. तुलनात्मक अवस्था में सामान्यतः किस विभक्ति का प्रयोग होता है? (संस्कृत में)

प्रश्न 15. उत्तमावस्था में सामान्यतः किस विभक्ति का प्रयोग होता है? (संस्कृत में)

प्रश्न 16. “सुन्दर” शब्द की तुलनात्मक अवस्था क्या होगी?

प्रश्न 17. “मधुर” शब्द की उत्तमावस्था क्या होगी?

प्रश्न 18. “रामः मोहनात् सुन्दरतरः अस्ति।” इसमें कौन-सी अवस्था है?

प्रश्न 19. “गङ्गा विश्व की सबसे पवित्र नदी है।” इसमें कौन-सी अवस्था है?

प्रश्न 20. “यह पर्वत ऊँचा है।” इसमें कौन-सी अवस्था है?

उत्तर 1. विशेषण की तीन अवस्थाएँ होती हैं।

उत्तर 2. जब विशेषण अपने सामान्य रूप में प्रयुक्त होता है और उसमें किसी प्रकार की तुलना नहीं होती, उसे सामान्य अवस्था कहते हैं।

उत्तर 3. जब दो व्यक्तियों या वस्तुओं के बीच तुलना करके किसी एक को अधिक या कम बताया जाता है, उसे तुलनात्मक अवस्था कहते हैं।

उत्तर 4. जब दो से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं में किसी एक को सबसे अधिक या सबसे कम बताया जाता है, उसे उत्तमावस्था कहते हैं।

अभ्यास प्रश्न (विशेषण की अवस्थाएँ) उत्तर..

1. विशेषण की तीन अवस्थाएँ होती हैं।

2. जब विशेषण अपने सामान्य रूप में प्रयुक्त होता है और उसमें किसी प्रकार की तुलना नहीं होती, उसे सामान्य अवस्था कहते हैं।

3. जब दो व्यक्तियों या वस्तुओं के बीच तुलना करके किसी एक को अधिक या कम बताया जाता है, उसे तुलनात्मक अवस्था कहते हैं।

4. जब दो से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं में किसी एक को सबसे अधिक या सबसे कम बताया जाता है, उसे उत्तमावस्था कहते हैं।

5. तुलनात्मक अवस्था।

6. उत्तमावस्था।

7. सामान्य अवस्था।

8. से, से अधिक, से कम, की अपेक्षा, की तुलना में आदि।

9. तर (तरप्) तथा ईयस् प्रत्यय।

10. तम (तमप्) तथा इष्ठन प्रत्यय।

11. तुलनात्मक अवस्था।

12. उत्तमावस्था।

13. सामान्य अवस्था।

14. पंचमी विभक्ति।

15. सप्तमी विभक्ति।

16. सुन्दरतर।

17. मधुरतम।

18. तुलनात्मक अवस्था।

19. उत्तमावस्था।

20. सामान्य अवस्था।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1. विशेषण की अवस्थाएँ क्या होती हैं?
उत्तर – जब किसी विशेषण के द्वारा व्यक्तियों या वस्तुओं के गुण-दोष की तुलना की जाती है, तब उसे विशेषण की अवस्थाएँ कहा जाता है।

प्रश्न 2. विशेषण की कितनी अवस्थाएँ होती हैं?
उत्तर – विशेषण की तीन अवस्थाएँ होती हैं – सामान्य अवस्था, तुलनात्मक अवस्था और उत्तमावस्था।

प्रश्न 3. सामान्य अवस्था क्या होती है?
उत्तर – जब विशेषण बिना किसी तुलना के सामान्य रूप में प्रयोग होता है, तब वह सामान्य अवस्था कहलाती है।

प्रश्न 4. तुलनात्मक अवस्था क्या होती है?
उत्तर – जब दो व्यक्तियों या वस्तुओं के बीच तुलना की जाती है और किसी एक को अधिक या कम बताया जाता है, तब वह तुलनात्मक अवस्था कहलाती है।

प्रश्न 5. उत्तमावस्था क्या होती है?
उत्तर – जब दो से अधिक व्यक्तियों या वस्तुओं में किसी एक को सबसे श्रेष्ठ या सबसे कम बताया जाता है, तब उसे उत्तमावस्था कहते हैं।

प्रश्न 6. संस्कृत में तुलनात्मक अवस्था कैसे बनती है?
उत्तर – संस्कृत में तुलनात्मक अवस्था बनाने के लिए विशेषण के साथ तर या ईयस् प्रत्यय लगाए जाते हैं।

प्रश्न 7. संस्कृत में उत्तमावस्था कैसे बनती है?
उत्तर – संस्कृत में उत्तमावस्था बनाने के लिए तम या इष्ठन प्रत्यय लगाए जाते हैं।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top