हिन्दी व्याकरण में पद परिचय एक महत्वपूर्ण विषय है। इसके अंतर्गत वाक्य में प्रयुक्त प्रत्येक शब्द का व्याकरणिक विश्लेषण किया जाता है। अर्थात यह बताया जाता है कि वाक्य में प्रयुक्त शब्द किस प्रकार का है, उसका लिंग, वचन, कारक, तथा क्रिया से क्या संबंध है।
इस विषय को समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि पद क्या होता है और पद-परिचय किसे कहते हैं।
पद किसे कहते हैं?
वर्णों के मेल से शब्द बनते हैं और शब्दों के मेल से वाक्य बनता है।
जब कोई शब्द अकेले होता है, तो उसके कई अर्थ हो सकते हैं। परन्तु वही शब्द जब किसी वाक्य में प्रयुक्त होकर निश्चित अर्थ प्रकट करता है, तब उसे पद कहा जाता है।
पद की परिभाषा
जब कोई शब्द वाक्य में प्रयुक्त होकर निश्चित अर्थ व्यक्त करता है, तब वह पद कहलाता है।
पद-परिचय की परिभाषा
वाक्य में प्रयुक्त किसी पद या सभी पदों का व्याकरण की दृष्टि से विश्लेषण करना पद-परिचय कहलाता है।
उदाहरण –
वैभव वाराणसी जा रहा है।
इस वाक्य में पद-परिचय इस प्रकार होगा –
- वैभव – व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, जा रहा है क्रिया का कर्ता।
- वाराणसी – व्यक्तिवाचक संज्ञा, एकवचन, जा रहा है क्रिया का आधार (स्थान)।
- जा रहा है – अकर्मक क्रिया, अपूर्ण वर्तमान काल, कर्तृवाच्य।
पद-परिचय के लिए अन्य शब्द भी प्रयुक्त होते हैं जैसे –
पद-निर्देश, पद-निर्णय, पदान्वय, पद-विश्लेषण, पद-विन्यास, पदच्छेद, शब्दबोध, वाक्य-विवरण आदि।
पद परिचय के आधार
वाक्य में आये हुए पदों का परिचय सामान्यतः निम्नलिखित आधारों पर दिया जाता है –
- संज्ञा
- सर्वनाम
- विशेषण
- क्रिया
- क्रिया विशेषण
- संबंधबोधक
- समुच्चयबोधक
- विस्मयादिबोधक
1. संज्ञा पद का परिचय
संज्ञा का पद-परिचय देते समय निम्न बातें बताई जाती हैं –
- संज्ञा का भेद (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक आदि)
- लिंग
- वचन
- कारक
- क्रिया से संबंध
उदाहरण
कविता पत्र लिखती है।
- कविता – व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन, कर्ता कारक, लिखती है क्रिया की कर्ता।
छात्र विद्यालय जाते हैं।
- छात्र – जातिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, बहुवचन, कर्ता कारक, जाते हैं क्रिया का कर्ता।
सर्वनाम पद का परिचय
सर्वनाम पद का परिचय देते समय यह बताया जाता है –
- सर्वनाम का प्रकार
- पुरुष (प्रथम, मध्यम, अन्य)
- लिंग और वचन
- कारक
- क्रिया से संबंध
- यह किस संज्ञा के स्थान पर आया है
उदाहरण
वे दोनों वेद पढ़ते हैं।
- वे दोनों – पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, द्विवचन, कर्ता कारक, पढ़ते हैं क्रिया का कर्ता।
तुम कल कविता सुनाओगे।
- तुम – पुरुषवाचक सर्वनाम, मध्यम पुरुष, एकवचन, कर्ता कारक, सुनाओगे क्रिया का कर्ता
विशेषण पद का परिचय
विशेषण का पद-परिचय देते समय यह बताया जाता है –
- विशेषण का प्रकार (गुणवाचक, संख्यावाचक, परिमाणवाचक आदि)
- लिंग
- वचन
- अवस्था (मूल, उत्तर, उत्तम)
- विशेष्य (जिसकी विशेषता बताई जा रही है)
उदाहरण
भगवान राम सर्वश्रेष्ठ राजा थे।
- सर्वश्रेष्ठ – गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, उत्तम अवस्था, विशेष्य – राम।
वीर शिवाजी ने मुगलों को परेशान किया।
- वीर – गुणवाचक विशेषण, पुल्लिंग, एकवचन, मूल अवस्था, विशेष्य – शिवाजी।
क्रिया पद का परिचय
क्रिया का पद-परिचय देते समय निम्न बातें बताई जाती हैं –
- क्रिया का भेद (सकर्मक / अकर्मक)
- काल
- लिंग, वचन, पुरुष
- वाच्य
- कर्ता और कर्म से संबंध
उदाहरण
रितेश फुटबॉल खेलता है।
- खेलता है – सकर्मक क्रिया
- काल – वर्तमान काल
- वचन – एकवचन
- वाच्य – कर्तृवाच्य
- कर्ता – रितेश
- कर्म – फुटबॉल
क्रिया विशेषण का पद परिचय
क्रिया विशेषण के पद-परिचय में बताया जाता है –
- उसका प्रकार (रीतिवाचक, स्थानवाचक, कालवाचक, परिमाणवाचक)
- वह किस क्रिया की विशेषता बता रहा है
उदाहरण
वर्षा जोर से हो रही है।
- जोर से – रीतिवाचक क्रिया विशेषण, जो वर्षा की क्रिया का प्रकार बता रहा है।
वह ध्यानपूर्वक पुस्तक पढ़ रहा है।
- ध्यानपूर्वक – रीतिवाचक क्रिया विशेषण, पढ़ने की क्रिया की विशेषता बता रहा है।
वह छत पर कूद रहा है।
- छत पर – स्थानवाचक क्रिया विशेषण।
तुम बहुत बोलते हो।
- बहुत – परिमाणवाचक क्रिया विशेषण।
ध्यान दें – क्रिया विशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक अव्यय होते हैं, इसलिए इनका लिंग, वचन या पुरुष नहीं होता।
संबंधबोधक पद का परिचय
संबंधबोधक का परिचय देते समय यह बताया जाता है –
- संबंधबोधक का प्रकार
- वह किन पदों के बीच संबंध स्थापित कर रहा है
उदाहरण
सड़क के दोनों ओर वृक्ष हैं।
- दोनों ओर – दिशावाचक संबंधबोधक, जो सड़क और वृक्ष के बीच संबंध बना रहा है।
कथा के बाद भंडारा होगा।
- के बाद – कालवाचक संबंधबोधक।
समुच्चयबोधक पद का परिचय
समुच्चयबोधक शब्द दो शब्दों या वाक्यों को जोड़ने का कार्य करते हैं।
परिचय देते समय बताया जाता है –
- समुच्चयबोधक का प्रकार
- वह किन पदों या वाक्यों को जोड़ रहा है
उदाहरण
मोहन सुबह गया और शाम को लौट आया।
- और – समानाधिकरण समुच्चयबोधक, जो दो वाक्यों को जोड़ रहा है।
रमेश की बस छूट गई इसलिए वह देर से पहुँचा।
- इसलिए – परिणामवाचक समुच्चयबोधक।
विस्मयादिबोधक पद का परिचय
विस्मयादिबोधक शब्दों से भाव प्रकट होता है, जैसे –
हर्ष, शोक, भय, क्रोध, आश्चर्य आदि।
उदाहरण
- ओह! उसकी एकमात्र संतान भी नहीं रही। — शोक सूचक
- छि:! कितनी गंदगी है। — घृणा सूचक
- वाह! वह कक्षा में प्रथम आया। — प्रशंसा सूचक
- आहा! हम जीत गए। — हर्ष सूचक
- अरे! मोहन भी नाचता है। — विस्मय सूचक
पद-परिचय कैसे करें (सरल तालिका)
| पद का प्रकार | पद-परिचय में क्या बताना चाहिए | उदाहरण |
|---|---|---|
| संज्ञा | संज्ञा का भेद, लिंग, वचन, कारक, क्रिया से संबंध | राम – व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता |
| सर्वनाम | सर्वनाम का प्रकार, पुरुष, लिंग, वचन, कारक | वह – पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, एकवचन |
| विशेषण | विशेषण का भेद, लिंग, वचन, अवस्था, विशेष्य | सुंदर – गुणवाचक विशेषण, विशेष्य – फूल |
| क्रिया | क्रिया का भेद, काल, वाच्य, लिंग, वचन | खेलता है – सकर्मक क्रिया, वर्तमान काल |
| क्रिया विशेषण | प्रकार और किस क्रिया की विशेषता बता रहा है | धीरे – रीतिवाचक क्रिया विशेषण |
| संबंधबोधक | प्रकार और किन शब्दों के बीच संबंध | के बाद – कालवाचक संबंधबोधक |
| समुच्चयबोधक | प्रकार और किन वाक्यों को जोड़ रहा है | और – संयोजक |
| विस्मयादिबोधक | किस भाव को प्रकट कर रहा है | वाह! – प्रशंसा सूचक |
पद-परिचय करने की आसान विधि
जब भी किसी शब्द का पद-परिचय करना हो तो इन चरणों का पालन करें —
1️⃣ पहले पहचानें कि शब्द कौन-सा पद है (संज्ञा, सर्वनाम आदि)।
2️⃣ फिर उसका लिंग और वचन बताएं।
3️⃣ उसके बाद कारक या पुरुष बताएं।
4️⃣ अंत में बताएं कि वह क्रिया से कैसे संबंधित है।
इस प्रकार वाक्य में आए हुए प्रत्येक पद का व्याकरण के अनुसार परिचय दिया जाता है।
यदि यह जानकारी उपयोगी लगी हो, तो आप अपने सुझाव या प्रश्न comment box में अवश्य लिखें।
प्रश्न.उत्तर
प्रश्न 1..पद-परिचय किसे कहते हैं?
उत्तर..”वाक्य में प्रयुक्त सभी पदों का या किसी एक पद का व्याकरण की दृष्टि से परिचय देना, पद-परिचय कहलाता है। “
2..वाक्य में प्रयुक्त शब्द क्या कहे जाते हैं?
उत्तर.. पद।
- प्रश्न 3..पद परिचय के लिये आवश्यक है..
- क.प्रत्येक पद को अलग अलग करना
- ख..प्रत्येक पद का प्रभार एवं वाक्य से संबन्ध दिखाना
- ग..हर एक पद का कार्य बताना तथा वाक्य विन्यास बताना
- घ..उपरोक्त सभी
उत्तर.. उपरोक्त सभी
- प्रश्न 4..संज्ञा पद का परिचय देते समय बताया जाता है..
- क. संज्ञा का भेद
- ख.लिङ्ग, वचन, पुरुष, संज्ञा का कारक
- ग.. क्रिया तथा अन्य पदों के साथ संबन्ध
- घ.. उपरोक्त सभी
उत्तर.. घ उपरोक्त सभी
- प्रश्न.5..विशेषण पद का परिचय देते समय क्या आवश्यक होता है?
- क. भेद ,
- ख..लिङ्ग
- ग..वचन, अवस्था, विशेष्य
- घ.सभी
उत्तर..सभी।
प्रश्न 6..हाय! रमेश के पिता जी की मृत्यु हो गई… यह किस प्रकार के पद परिचय का उदाहरण है?
उत्तर..विस्मयादिबोधक
निम्न लिखित प्रश्नों के उतर दीजिये..
निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित पदों का पद-परिचय कीजिए
- राम विद्यालय जाता है।
- सीता पुस्तक पढ़ रही है।
- वे मैदान में खेल रहे हैं।
- मोहन तेज़ दौड़ता है।
- राधा सुंदर गाना गाती है।
- वह धीरे-धीरे चल रहा है।
- मोहन और सोहन साथ गए।
- अरे! तुम यहाँ कैसे आए?
- बच्चा खुशी से नाच रहा है।
- हम कल यात्रा पर जाएंगे।
ख) संज्ञा पद का पद-परिचय कीजिए
- गंगा पवित्र नदी है।
- दिल्ली भारत की राजधानी है।
- बालक खेल रहे हैं।
- शिक्षक पढ़ा रहे हैं।
- किताब मेज पर रखी है।
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पुनरुक्त शब्द पुनरुक्ति द्विरुक्ति
उत्तरमाला (Solutions)
- राम – व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, कर्ता कारक।
- सीता – व्यक्तिवाचक संज्ञा, स्त्रीलिंग, एकवचन।
- वे – पुरुषवाचक सर्वनाम, अन्य पुरुष, बहुवचन।
- तेज़ – गुणवाचक विशेषण।
- सुंदर – गुणवाचक विशेषण।
- धीरे-धीरे – रीतिवाचक क्रिया विशेषण।
- हम – प्रथम पुरुष सर्वनाम, बहुवचन।
- तुम – मध्यम पुरुष सर्वनाम।
- अरे! – विस्मयादिबोधक, आश्चर्य सूचक।
- खुशी से – रीतिवाचक क्रिया विशेषण।
- गंगा – व्यक्तिवाचक संज्ञा।
- दिल्ली – व्यक्तिवाचक संज्ञा।
- बालक – जातिवाचक संज्ञा, बहुवचन।
- शिक्षक – जातिवाचक संज्ञा।
- किताब – जातिवाचक संज्ञा।